विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

UP के प्रयागराज में यहां श्रीराम से पहले क्यों पूजे जाते हैं रावण? पुतले का दहन भी नहीं किया जाता

By Sharad Dwivedi Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Thu, 01 Oct 2026 04:34 PM (IST)

प्रयागराज में श्रीकटरा रामलीला कमेटी श्रीराम से पहले रावण की पूजा करती है और उनके पुतले का दहन नहीं करती। ...और पढ़ें

प्रयागराज में कटरा रामलीला की कमेटी की ओर से निकाली गई रावण बरात। जागरण आर्काइव

प्रयागराज में कटरा रामलीला की कमेटी की ओर से निकाली गई रावण बरात। जागरण आर्काइव

HighLights

  1. रावण के पुतले का दहन श्रीकटरा रामलीला कमेटी नहीं कराती है

  2. 6 अक्टूबर को निकलेगी रावण के साथ उनके परिवार की शोभायात्रा

शरद द्विवेदी, प्रयागराज। अन्यायी, अत्याचारी, अधर्मी के रूप में लंकापति रावण की पहचान है। अधर्म पर धर्म, बुराई पर अच्छाई की विजय दर्शाने के लिए दशहरा पर्व पर रामलीला कमेटियां श्रीराम से रावण के पुतले का दहन करवाती हैं। इससे इतर तीर्थराज प्रयाग में एक स्थान पर रावण को सम्मान के भाव से देखा जाता है।

महर्षि भरद्वाज के नाती रावण की की जाती है पूजा 

महर्षि भरद्वाज का नाती होने के कारण श्रीकटरा रामलीला कमेटी रावण को ऋषि पुत्र, प्रकांड विद्वान, महान तपस्वी और पराक्रमी के स्वरूप में पूजती है। कमेटी श्रीराम से पहले रावण की पूजा कराने के साथ उनका पुतला दहन नहीं करवाती।

हाथी पर चांदी के सिंहासन पर निकलेगी रावण शोभायात्रा 

पितृपक्ष की एकादशी तिथि पर महर्षि भरद्वाज आश्रम में मंत्रोच्चार से रावण की पूजा होती है। रामदल से पहले रावण की अलौकिक शोभायात्रा निकाली जाती है। अबकी छह अक्टूबर को रावण हाथी पर रखे चांदी के सिंहासन पर आसीन होकर निकलेंगे। वहीं, उनकी पत्नी मंदोदरी चांदी की चौकी में बैठेंगी।

कुंभकर्ण, विभीषण, मेघनाद रथ पर आसीन होंगे 

कुंभकर्ण, विभीषण, मेघनाद भव्य रथ पर आसीन होकर दर्शन देने निकलेंगे। रामलीला की शुरुआत 10 अक्टूबर को रावण जन्म से होगी। प्रभु श्रीराम की भांति मंच पर रावण की विद्वता और पराक्रम वाले भाग को अधिक दिखाया जाएगा।

रावण का ननिहाल माना गया है कटरा इलाका 

कमेटी के अध्यक्ष सुधीर कुमार गुप्ता ''कक्कू'' के अनुसार त्रेता युग में महर्षि भरद्वाज का आश्रम जिस स्थान पर था उसकी पहचान कटरा मुहल्ला के रूप में है। उस दृष्टि से रावण का ननिहाल कटरा हुआ। इसी कारण उन्हें आदर देते हैं। कमेटी के पूर्व अध्यक्ष गोपालबाबू जायसवाल कहते हैं ननिहाल में हर व्यक्ति सम्मानीय होता है। उसी परंपरा का निर्वहन करते हुए रावण हमारे लिए पूज्यनीय हैं।

रावण के पात्र को धार्मिक होने की लेनी पड़ती है शपथ

रावण ब्राह्मण थे। इसी कारण श्रीकटरा रामलीला कमेटी शोभायात्रा में सिर्फ ब्राह्मण को रावण के लिए चुनती है। संबंधित व्यक्ति का आचरण धार्मिक होना चाहिए। वह शपथ लेकर बताता है कि कभी मांस-मदिरा का सेवन नहीं किया। भविष्य में भी ऐसा नहीं करेगा उसका संकल्प लेता है। समस्त कसौटी पर खरा उतरने वाले को रावण बनाते हैं।

Doctor vipin

रावण-कुबेर एक पिता के संतान : डॉ. बिपिन

विश्व पुरोहित परिषद के अध्यक्ष डॉ. बिपिन पांडेय के अनुसार ब्रह्मा जी के छह मानस पुत्रों में ऋषि पुलस्त्य भी थे। पुलस्त्य का विवाह हविर्भू से हुआ। इनसे महर्षि विश्रवा और अगस्त्य जैसे तपस्वी पुत्र हुए। विश्रवा से महर्षि भरद्वाज ने अपनी पुत्री इड़विड़ा का विवाह किया। वहीं, विश्रवा का दूसरा विवाह राक्षसराज सुमाली की पुत्री कैकसी से हुआ। इड़विड़ा से वैश्रवण अर्थात कुबेर पैदा हुए। ब्रह्माजी ने कुबेर को चौथा लोकपाल नियुक्त किया, जबकि कैकसी से रावण, कुंभकर्ण, विभीषण और सूपर्णखा का जन्म हुआ।

रावण का महात्म्य बताया

उन्होंने कहा कि इस तरह से कुबेर लंकापति रावण के भाई और महर्षि भरद्वाज उनके नाना हुए। यही कारण है कि प्रभु श्रीराम लंकेश का वध करके प्रयाग आए तो महर्षि भरद्वाज ने ब्रह्म हत्या करने के कारण उन्हें आशीर्वाद देने से इनकार कर दिया। ब्रह्म हत्या से मुक्ति को श्रीराम ने सवा करोड़ पार्थिव शिवलिंग का अभिषेक किया तब उन्हें आशीर्वाद मिला।

यह भी पढ़ें- स्वामी रामभद्राचार्य के विरुद्ध परिवाद प्रयागराज जिला अदालत में दाखिल, FIR दर्ज करने की मांग की गई

यह भी पढ़ें- प्रयागराज में यूनाइटेड इंजीनियरिंग कॉलेज की छात्रा की मौत से छात्र आक्रोशित, विरोध-प्रदर्शन व कक्षा बहिष्कार कर नारेबाजी की