इलाहाबाद विश्वविद्यालय: प्राचीन और मध्यकालीन इतिहास में बीए की डिग्री अब इतिहास में स्नातक के समकक्ष
इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने प्राचीन और मध्यकालीन इतिहास में बीए की डिग्री को अब इतिहास में स्नातक के समकक्ष माना है। ...और पढ़ें

इलाहाबाद विश्वविद्यालस।
HighLights
विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक ने जारी किया पत्र, अभ्यर्थियों को ज्वाइनिंग में मिल सकती है राहत
शिक्षक भर्ती और नियुक्ति के दौरान अपनी डिग्री की समकक्षता साबित करने में परेशानी न होगी
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से प्राचीन इतिहास, मध्यकालीन इतिहास और आधुनिक इतिहास विषयों में बीए करने वाले विद्यार्थियों को अब इतिहास में स्नातक की समकक्षता के प्रमाणपत्र के लिए परेशान नहीं होना होगा। विश्वविद्यालय ने इन विषयों में प्राप्त स्नातक डिग्री को इतिहास में स्नातक डिग्री के समकक्ष मानने संबंधी प्रमाणपत्र जारी कर दिया है।
इस प्रमाणपत्र के बाद उन अभ्यर्थियों की लंबे समय से चली आ रही समस्या के समाधान मिल गया है, जिन्हें शिक्षक भर्ती और नियुक्ति के दौरान अपनी डिग्री की समकक्षता साबित करने में परेशानी का सामना करना पड़ता था।
विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक की ओर से जारी प्रमाणपत्र में स्पष्ट किया गया है कि प्राचीन इतिहास विषय में बीए की डिग्री इतिहास में स्नातक डिग्री के समकक्ष है। इसके साथ ही मध्यकालीन इतिहास और आधुनिक इतिहास विषयों में बीए करने वाले अभ्यर्थियों की डिग्री को भी इतिहास में स्नातक के बराबर माना गया है।
विश्वविद्यालय में इस संबंध में गठित समिति की सिफारिश के बाद समकक्षता का प्रमाणपत्र जारी किया गया है। इवि में इतिहास अध्ययन से संबंधित दो अलग-अलग विभाग हैं। इनमें पहला प्राचीन इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग और दूसरा मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग है।
दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश सहित देश के कई अन्य राज्यों के विश्वविद्यालयों में सामान्य तौर पर इतिहास विभाग के तहत ही इतिहास की पढ़ाई होती है। इसी अंतर के कारण भर्ती प्रक्रिया में डिग्री के नाम को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हो रही थी। इसकी वजह से शिक्षक भर्तियों के लिए आवेदन करने वाले इलाहाबाद विश्वविद्यालय से प्राचीन इतिहास या मध्यकालीन इतिहास के स्नातक छात्रों को परेशानी उठानी पड़ती थी।
कई भर्तियों में शैक्षणिक योग्यता के रूप में इतिहास विषय में स्नातक डिग्री मांगी जाती है। ऐसे में इवि से इतिहास के दो क्षेत्रों में अलग-अलग बीए करने वाले अभ्यर्थियों को अपनी डिग्री की स्वीकार्यता स्पष्ट करने में कठिनाई होती थी। डिग्री की समकक्षता पर बिहार और झारखंड में भी शिक्षक भर्ती तथा अन्य चयन प्रक्रियाओं के दौरान इस विषय पर सवाल उठाए जाते थे।
अभ्यर्थियों से सवाल किया जाता था कि उन्होंने सामान्य इतिहास के बजाय प्राचीन इतिहास से स्नातक किया है। कुछ मामलों में चयन के बाद नियुक्ति या ज्वाइनिंग की प्रक्रिया के दौरान भी डिग्री की समकक्षता को लेकर स्पष्टीकरण मांगे जाने की समस्या सामने आती थी।
