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एक साल से चार्जशीट दबाए रही पुलिस, हाई कोर्ट ने कहा- दाल में कुछ काला, गृह सचिव से मांगा पर्सनल एफिडेविट

Published: Sat, 31 Oct 2026 06:03 AM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने पुलिस द्वारा एक आपराधिक मामले में चार्जशीट दाखिल करने में एक साल की ...और पढ़ें

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HighLights

  1. पुलिस ने एक साल से चार्जशीट दाखिल नहीं की।

  2. हाई कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।

  3. गृह सचिव को देरी का कारण बताने का निर्देश दिया।

विधि संवाददाता, लखनऊ। आपराधिक मामले में करीब एक साल पहले चार्जशीट तैयार होने के बावजूद उसे अदालत में दाखिल नहीं किए जाने पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि मामले में कुछ ऐसा है, जो सामने नहीं आ रहा है।

खंडपीठ ने अपर मुख्य सचिव (गृह) को तीन सप्ताह में व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर देरी का कारण बताने का निर्देश दिया है। यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी।न्यायमूर्ति अब्दुल मोइन और न्यायमूर्ति राजीव भारती की पीठ निहारिका मिश्रा की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

याची ने आपराधिक धमकी और अश्लील सामग्री प्रकाशित अथवा प्रसारित करने से संबंधित धाराओं में दर्ज प्राथमिकी के मामले में पुलिस को चार्जशीट अदालत में दाखिल करने का निर्देश देने की मांग की थी। 25 अगस्त को पुलिस ने अदालत को जानकारी दी थी कि चार्जशीट अग्रसारित कर दी गई है और जल्द ही दाखिल कर दी जाएगी।

इसके बावजूद अब तक उसे पेश नहीं किया गया। राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि चार्जशीट 26 अक्टूबर 2025 को तैयार की गई थी और 20 दिसंबर 2025 को क्षेत्राधिकारी को भेजी गई थी। हालांकि, 13 जनवरी 2026 को सहायक अभियोजन अधिकारी (एपीओ) ने उस पर आपत्तियां लगाकर आगे की विवेचना के लिए वापस भेज दिया था।

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इस पर कोर्ट ने कहा कि जब मामला अदालत में विचाराधीन था, तब अधिकारियों से अपेक्षा थी कि वे पूरी जानकारी उपलब्ध कराते। खंडपीठ ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 177 का उल्लेख करते हुए कहा कि पुलिस रिपोर्ट दाखिल करने की कोई निश्चित समय-सीमा भले ही निर्धारित नहीं है, लेकिन कानून में इसे बिना विलंब मजिस्ट्रेट के समक्ष भेजने का प्रविधान है। मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर को होगी।

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