एसएसपी बरेली पर सख्त टिप्पणी के लिए हाई कोर्ट ने जताया खेद, तथ्य छिपाने वाले याची पर 50000 का जुर्माना
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बरेली के एसएसपी अनुराग आर्या पर की गई कठोर मौखिक टिप्पणियों पर खेद व्यक्त किया है। ...और पढ़ें

HighLights
हाई कोर्ट ने एसएसपी पर टिप्पणी पर खेद जताया।
याची ओमेंद्र यादव पर 50 हजार का जुर्माना लगा।
तथ्य छिपाने पर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज।
विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बरेली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनुराग आर्या के खिलाफ की गई कठोर मौखिक टिप्पणियों पर खेद जताते हुए उन्हें अनावश्यक बताया है। अदालत ने तथ्य छिपाने वाले याची ओमेंद्र यादव पर 50 हजार रुपये का हर्जाना लगाकर उसकी दोनों बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाएं खारिज कर दीं हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने दिया हैं।
खंडपीठ ने कहा कि 27 अक्टूबर की सुनवाई में एसएसपी के हलफनामे में सीसीटीवी का विवरण न होने पर उसने टिप्पणी की थी कि प्रदेश पुलिस में सीसीटीवी खराब होने की प्रवृत्ति दिखती है। प्रथमदृष्टया एसएसपी ने झूठा हलफनामा दाखिल किया है, इसलिए उनकी व्यक्तिगत पेशी का निर्देश दिया गया था।
बाद में पता चला कि तथ्य याची ने छिपाए थे। याची का दावा था कि पुलिस ने उसे आठ से 13 मई तक अवैध रूप से हिरासत में रखा और 13 मई को औपचारिक गिरफ्तारी दिखाई।
अदालत ने पाया कि याचिका में हिरासत की तारीख, समय और स्थान का विशिष्ट उल्लेख नहीं था। यह जानकारी केवल समर्थन वाले हलफनामे के पेज 27 पर थी, जबकि इसे याचिका में होना चाहिए था। राज्य ने 18 मई को पहली याचिका पर जवाब दाखिल किया था।
इसके बाद याची ने 26 मई को उसी घटना को लेकर दूसरी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की, लेकिन उसमें पहली याचिका का जिक्र नहीं किया। खंडपीठ ने इसे तथ्य छिपाना और असत्य का सुझाव देना बताया।
अदालत ने कहा कि यदि अपर शासकीय अधिवक्ता (एजीए) कार्यालय ने शुरुआत में ही बताया होता कि याचिका प्रक्रिया का दुरुपयोग है और याची स्वच्छ हाथों से अदालत नहीं आया है, तो एसएसपी को नाराजगी का निशाना नहीं बनाया जाता। खंडपीठ ने कहा कि ‘अनावश्यक कठोर मौखिक टिप्पणी के लिए उसे सच्चे हृदय से खेद है।’
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अदालत ने टिप्पणी की कि इस मामले में दोष एजीए कार्यालय और याची का है। दोनों याचिकाएं खारिज करते हुए अदालत ने प्रति याचिका 25 हजार रुपये (कुल 50 हजार रुपये) का हर्जाना लगाया। यह राशि एक महीने में एसएसपी को देनी होगी। ऐसा न होने पर इसे राजस्व बकाये के रूप में वसूल कर एसएसपी को दिया जाएगा।
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