जमानत के अगले दिन ही बिजनौर जिला जेल में कैदी की मौत पर इलाहाबाद HC सख्त, कहा- महानिदेशक दें संक्षिप्त जवाबी हलफनामा
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बिजनौर जिला जेल में जमानत मिलने के अगले ही दिन कैदी दीपक कुमार की संदिग्ध मौत ...और पढ़ें

इलाहाबाद उच्च न्यायालय।
HighLights
मामले की अगली सुनवाई पर सात अक्टूबर को होगी
कोर्ट को राज्य की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिला
विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। जमानत मिलने के अगले ही दिन बिजनौर जिला जेल में न्यायिक हिरासत के दौरान कैदी की संदिग्ध मौत मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा कि राज्य की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। महानिदेशक जेल को 10 दिन के भीतर संक्षिप्त जवाबी शपथ पत्र दाखिल कर यह बताने का निर्देश दिया है कि किन परिस्थितियों में मौत हुई।
ऐसा नहीं करने पर उन्हें सात अक्टूबर 2026 को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ेगा। अगली सुनवाई इसी तारीख पर होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति चंद्रधारी सिंह और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने चंद्रपाल की याचिका पर दिया है।
याची की मांग है कि उसके बेटे दीपक कुमार की हिरासत में मौत की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की जाए और दोषी जेल अधिकारियों पर कार्रवाई हो। साथ ही 19 मई 2026 को स्पीड पोस्ट से भेजे गए प्रार्थना पत्र पर कार्रवाई की जाए। दीपक कुमार को ट्रायल कोर्ट ने 18 फरवरी 2025 को आर्म्स एक्ट में दोषी ठहराते हुए छह साल की सजा सुनाई थी।
इसके खिलाफ दीपक कुमार ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी। आठ मई 2026 को एकलपीठ ने उसकी जमानत मंजूर कर ली। याचिका के अनुसार नौ मई 2026 को दीपक कुमार की पत्नी स्वाति जेल में मिलने गई और जेल प्रशासन को जमानत की जानकारी दी। उस दौरान दीपक कुमार ने जेल के भीतर जान को खतरा होने की आशंका जताई थी।
अगले दिन 10 मई 2026 को दोपहर 1:25 बजे स्वाति के मोबाइल पर काल आई। फोन करने वाले ने खुद को बिजनौर जेल का जेलर बताते हुए दीपक कुमार की मौत की सूचना दी। चंद्रपाल के अनुसार जब वह जेल पहुंचे तो बताया गया कि दीपक कुमार ने जेल अस्पताल परिसर में लगे पेड़ से लटक कर आत्महत्या कर ली है। परिवार ने सीसीटीवी फुटेज और घटनास्थल की फोटो मांगी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
