प्रयागराज में चर्च की जमीन पर नई लीज को इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती, अगली सुनवाई तक यथास्थिति का आदेश
प्रयागराज में चर्च की जमीन पर 90 साल की नई लीज को इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। ...और पढ़ें

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की फाइल फोटो।
HighLights
एकीकृत मंडलीय मुख्यालय के लिए दी गई है 90 साल की लीज
चर्च ऑफ नार्थ इंडिया ट्रस्ट एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई
विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। संगम नगरी में चर्च की जमीन पर 90 साल की नई लीज देकर एकीकृत मंडलीय मुख्यालय निर्माण के फैसले को इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। चर्च ऑफ नार्थ इंडिया ट्रस्ट एसोसिएशन की याचिका पर हाई कोर्ट ने अगली सुनवाई तक जमीन पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है और किसी भी पक्ष को तीसरे पक्ष का अधिकार सृजित किए जाने पर रोक लगा दी है।
यह आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने दिया है। राज्य सरकार को निर्देशित किया गया है कि वह अपना पक्ष अगली सुनवाई तिथि 12 अक्टूबर तक रखे। याची की तरफ से अधिवक्ता एडी सान्डर्स ने अदालत को बताया कि प्लाट नंबर 423 की करीब 1230 वर्ग मीटर जमीन पर राज्य सरकार ने 90 साल की लीज पर एकीकृत मंडलीय भवन बनाने का फैसला किया है, जबकि यह जमीन पहले से ही लीज पर है।
यह जमीन 30 मार्च 1905 को इलाहाबाद (अब प्रयागराज) के तत्कालीन कलेक्टर ने प्रेस्बिटेरियन चर्च आफ द यूनाइटेड स्टेट्स आफ अमेरिका को स्थायी लीज पर दी थी। बाद में यह संस्था कमीशन आन इक्यूमेनिकल मिशन एंड रिलेशंस आफ द यूनाइटेड प्रेस्बिटेरियन चर्च बन गई। भारत में इसकी संपत्तियों की देखरेख कर रही विभिन्न संस्थाओं का विलय कर 29 नवंबर 1970 को चर्चेज ऑफ नार्थ इंडिया (सीएनआइ) का गठन किया गया।
तीन मई 1982 को कमीशन ने नए ट्रस्टियों की नियुक्ति और ट्रस्ट ट्रांसफर के दस्तावेज निष्पादित कर जमीन के प्रबंधन और प्रशासन की जिम्मेदारी चर्च आफ नार्थ इंडिया को सौंप दी। याची संस्था का दावा है कि ट्रस्ट डीड में दर्ज जमीन की चहारदीवारी मूल लीज डीड से पूरी तरह मेल खाती है जो याचिका के साथ अनुलग्नक-एक के रूप में लगी है। इसी आधार पर दलील दी गई कि जब जमीन पहले से वैध लीज के अधीन है तो राज्य सरकार अपनी किसी संस्था के पक्ष में नई लीज कर निर्माण नहीं करा सकती।
