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Allahabad HC ने कहा- धर्म और जीवन साथी चुनने के लिए बालिग स्वतंत्र, परिवार की चिंता अर्थहीन

By Suresh pandey Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Thu, 17 Sep 2026 07:20 PM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि वयस्क व्यक्ति को धर्म और जीवनसाथी चुनने की पूरी स्वतंत्रता है, जिसमें परिवार ...और पढ़ें

इलाहाबाद उच्च न्यायालय।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय।

HighLights

  1. शामली के आयुष मलिक के मामले में दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका निस्तारित

  2. याचिका में आयुष को चार जून 2026 से घर में नजरबंद किए जाने का आरोप है

विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि धर्म और जीवनसाथी चुनना वयस्क व्यक्ति की निजी स्वतंत्रता है, उसकी मर्जी के आगे परिवार की चिंता अर्थहीन है। यह स्वतंत्रता संविधान के अनुच्छेद 25 और अनुच्छेद 21 में सुरक्षित है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकलपीठ ने शामली के आयुष मलिक की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका निस्तारित करते हुए की है।

आयुष को चार जून 2026 से घर में नजरबंद किए जाने का आरोप याचिका में लगाया गया था। कोर्ट के नौ सितंबर के आदेश के क्रम में शामली कोतवाली पुलिस ने बुधवार को आयुष को कोर्ट में पेश किया। कोर्ट में आयुष ने बताया कि उसकी उम्र 31 साल है और वह बी.फार्मा तक पढ़ा है। उसने 2014 में अपनी मर्जी से बिना किसी दबाव के इस्लाम धर्म अपना लिया था।

वह इस्लाम की जरूरी प्रथाओं का पालन कर रहा है, लेकिन उसके माता-पिता को यह मंजूर नहीं है। वह चांदनी कुरैशी से शादी करना चाहता है, लेकिन उसके परिवार वाले विरोध कर रहे हैं। इसी वजह से छह जून 2026 को थाना शामली में चांदनी कुरैशी और उसके रिश्तेदारों के खिलाफ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 और बीएनएस की धाराओं में एफआइआर दर्ज करा दी गई।

नामजद चांदनी और उसके पिता इस्लाम कुरैशी को 24 जुलाई 2026 को जिला जज ने जमानत दे दी थी। आयुष के पिता देवराज सिंह मलिक भी कोर्ट में उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि बेटे को किसी ने बहला-फुसलाया है, उसने अपनी मर्जी से धर्म नहीं बदला है। वह उसकी भलाई के लिए इस फैसले को नहीं मानते।

कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि आयुष वयस्क है और अपने जीवन के फैसले लेने में सक्षम है। उसके बयान पर अविश्वास करने का कोई कारण नहीं है। कोर्ट ने आयुष को इस बात के लिए स्वतंत्र कर दिया कि वह जहां चाहे, जिसके साथ चाहे रह सकता है, अपनी पसंद का धर्म मान सकता है और कानून के अनुसार शादी का फैसला ले सकता है।

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