पत्रकार की याचिका पर इलाहाबाद हाई कोर्ट सख्त, यूपी सरकार से मांगा जवाब
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पत्रकार सत्यम वर्मा की एनएसए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर केंद्र, यूपी सरकार और गौतमबुद्ध नगर डीएम ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।
HighLights
हाई कोर्ट ने एनएसए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई की।
केंद्र, यूपी सरकार और गौतमबुद्ध नगर डीएम से जवाब तलब।
पत्रकार ने नोएडा हिंसा के समय लखनऊ में होने का दावा किया।
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980 (एनएसए) के तहत निरुद्ध लखनऊ निवासी पत्रकार सत्यम वर्मा की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और गौतमबुद्ध नगर के जिलाधिकारी को अपना पक्ष रखने को कहा है।
न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने राज्य के अधिवक्ता के आग्रह पर दो सप्ताह में जवाबी हलफनामा दाखिल करने का समय दिया है और अगली सुनवाई सात अक्टूबर को नियत की है।
याची ने गौतमबुद्ध नगर के जिलाधिकारी द्वारा 12 मई को एनएसए के तहत पारित निरोध आदेश व राज्य सरकार के 20 मई 2026 के अनुमोदन आदेश को चुनौती दी है। याचिका में निरोध आदेशों को रद कर तत्काल रिहाई और अवैध हिरासत के लिए मुआवजे की मांग की गई है। याची के अनुसार वह घटनास्थल से लगभग 500 किलोमीटर दूर था।
याची का मुख्य तर्क है कि निरोध आदेश ‘तथ्यात्मक रूप से असंभव’ आधार पर पारित किया गया है। उसे 13 अप्रैल 2026 को नोएडा में हुए मजदूर आंदोलन में हिंसा में शामिल बताया गया है, जबकि सीसीटीवी फुटेज और काल डिटेल रिकार्ड (सीडीआर) के अनुसार वह उसी दिन दोपहर 2:14 बजे लखनऊ में था और हसनगंज पुलिस द्वारा हिरासत में लिया गया था।
