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धर्म परिवर्तन के बाद बहनों को 'बंदी' बनाने के मामले में मुआवजे के आदेश पर रोक, इलाहाबाद HC का फैसला

By Suresh pandey Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Fri, 09 Oct 2026 03:16 PM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आगरा की दो बहनों के धर्म परिवर्तन के बाद कथित तौर पर बंधक बनाए जाने के ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट।

इलाहाबाद हाई कोर्ट।

HighLights

  1. आगरा की दो सगी बहनों को इस्लाम धर्म अपनाने पर बंधक बनाने का मामला

  2. एकल पीठ ने पिता तथा राज्य सरकार को मुआवजा देने का आदेश दिया गया था

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उस फैसले पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है जिसमें आगरा की दो सगी बहनों को इस्लाम धर्म अपनाने के बाद कथित तौर पर बंधक बनाए जाने के मामले में पिता तथा राज्य सरकार को मुआवजा देने का आदेश दिया गया था। न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकल पीठ ने मुआवजे का आदेश दिया था और इसे चुनौती देने वाली राज्य सरकार की याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली तथा क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने यह रोक लगाई है।

आगरा के सदर बाजार निवासी अनिल भाटिया की बड़ी बेटी अंशु भाटिया उर्फ आमिना (35) और छोटी बेटी दिया भाटिया उर्फ जोया (20) ने कोर्ट बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई के दौरान एकलपीठ के समक्ष कहा था कि उन्होंने 2020 और 2021 में अपनी मर्जी से, बिना किसी दबाव या लालच के इस्लाम कबूल किया था। उनका आरोप था कि पिता ने इसके बाद उनके एजुकेशन सर्टिफिकेट, पासपोर्ट, बैंक पासबुक जब्त कर घर में कैद कर दिया और धर्म छोड़ने का दबाव बनाया।

पिता ने सदर बाजार थाने में अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन का केस दर्ज कराया था, जिसमें यूपी धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम और बीएन एस की धाराएं लगाई गईं। पुलिस ने बहनों को कोलकाता से बरामद कर पिता को सौंप दिया, जबकि एक दर्जन लोगों को गिरफ्तार कर लिया। बाद में बहनों की ओर से बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल हुई।

छह अगस्त 2026 को न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकलपीठ ने बहनों से सीधे बातचीत के बाद कहा था कि वयस्क महिला का धर्म चुनने का अधिकार मौलिक अधिकार है, जिसे सिर्फ आशंका के आधार पर रोका नहीं जा सकता। कोर्ट ने कहा था- 'संविधान माता-पिता को यह लाइसेंस नहीं देता कि वे धर्म नापसंद होने पर बालिग बच्चों को कैद कर लें।'

कोर्ट ने दोनों को कहीं भी, किसी के भी साथ रहने की आजादी दी और पिता और यूपी सरकार को संयुक्त रूप से 25 लाख रुपये (दोनों को 12.5-12.5 लाख) मुआवजा आठ सप्ताह में देने को कहा था। प्रदेश सरकार ने इस मुआवजे के आदेश को डिवीजन बेंच में चुनौती देते तर्क दिया है कि धर्म परिवर्तन साजिश का हिस्सा हो सकता है।

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