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किसान की 23 किस्त रोकने पर हाई कोर्ट सख्त, 6% ब्याज के साथ सभी इंस्टॉलमेंट देने का आदेश; 5000 का जुर्माना भी लगाया

Published: Fri, 09 Oct 2026 04:56 AM (GMT+05:30)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कानपुर देहात के एक किसान को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 23 किस्तें न मिलने पर ...और पढ़ें

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HighLights

  1. हाई कोर्ट ने पीएम किसान की 23 किस्तें रोकने पर नाराजगी जताई।

  2. 6% ब्याज और 5,000 रुपये हर्जाने के साथ भुगतान का आदेश।

  3. गलत IFSC कोड और ई-केवाईसी के कारण किसान को परेशानी हुई।

विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कानपुर देहात के एक किसान को करीब छह साल तक प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की किस्तों से वंचित रखने पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने बकाया किस्तों का भुगतान 30 नवंबर तक छह प्रतिशत ब्याज सहित करने और 5,000 रुपये हर्जाना देने का आदेश दिया है।

न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ल की खंडपीठ ने विश्राम सिंह की रिट याचिका स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया है। किसान ने खुद पैरवी करते हुए बताया कि उनके बैंक शाखा का आइएफएससी कोड गलत दर्ज होने के कारण 23 किस्तें नहीं मिलीं। उन्होंने आठ जनवरी 2020 को उप कृषि निदेशक को आवेदन देकर गलती सुधारने का अनुरोध किया था, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।

 ई-केवाईसी की स्थिति ‘नहीं’ होने के कारण रुका था भुगतान

उप कृषि निदेशक ने हलफनामे में आवेदन मिलने से इन्कार नहीं किया, लेकिन कहा कि उस समय वह पद पर नहीं थे। विभाग के अनुसार अब भुगतान आधार आधारित डीबीटी प्रणाली से होता है। पोर्टल पर भूमि सीडिंग 29 अगस्त 2022 और आधार सीडिंग 31 दिसंबर 2023 को सत्यापित दर्ज थी। भुगतान ई-केवाईसी की स्थिति ‘नहीं’ होने के कारण रुका था।

कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद 18 सितंबर को ई-केवाईसी और फार्मर रजिस्ट्री की औपचारिकताएं पूरी कर डाटा उसी दिन पोर्टल से भारत सरकार को भेजा गया। विभाग ने बताया कि अगली किस्त नवंबर में जारी होने की उम्मीद है और बकाया तथा नियमित किस्त उसी समय खाते में आएगी। पीठ ने कहा कि ई-केवाईसी लंबित होने की बात मानने पर भी विभाग ने आठ जनवरी 2020 के आवेदन पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की, इसका कोई औचित्य नहीं है।

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किसान को बिना गलती के कोर्ट आना पड़ा और करीब छह साल तक परेशानी झेलनी पड़ी। आदेश के मुताबिक प्रत्येक बकाया किस्त पर उसकी देय तिथि से वास्तविक भुगतान तक छह प्रतिशत सालाना ब्याज देना होगा। आगे की किस्तें भी नियत समय पर जारी की जाएं और पांच हजार रुपये हर्जाना बकाया राशि के साथ चुकाया जाय।