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परिवार न्यायालयों में काउंसलर नियुक्ति पर रोक, इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

Published: Fri, 09 Oct 2026 09:02 AM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रदेश के परिवार न्यायालयों में काउंसलर की नई नियुक्तियों पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट।

इलाहाबाद हाई कोर्ट।

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने काउंसलर की नई नियुक्तियों पर लगाई रोक।

  2. राज्य सरकार से नियुक्ति नियमावली बनाने को कहा गया।

  3. याचिकाकर्ताओं को कार्य जारी रखने की अनुमति मिली।

विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रदेश के परिवार न्यायालयों में काउंसलर की नियुक्ति के लिए 14 सितंबर को जारी विज्ञापन के तहत नियुक्तियां करने पर रोक लगा दी है।

कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि 19 मार्च 2026 के उसके आदेश के अनुसार नियुक्ति नियमावली तैयार की गई है अथवा नहीं। नियमावली नहीं बनने की स्थिति में मौजूदा विज्ञापन के तहत नियुक्तियां नहीं की जाएंगी।

वीरेंद्र सिंह और तीन अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने यह आदेश दिया। याचियों का पक्ष अधिवक्ता अग्निहोत्री कुमार त्रिपाठी ने पक्ष रखा।याचिका में नई नियुक्तियों के विज्ञापन को चुनौती दी गई है।

याचियों का कहना है कि उन्हें 2020 में इलाहाबाद और कानपुर के परिवार न्यायालयों में काउंसलर पद पर तदर्थ आधार पर नियुक्त किया गया था। उन्होंने समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लिया। तीन वर्ष बाद उनका कार्यकाल अगले तीन वर्ष के लिए बढ़ाया गया।

अब उनका कार्यकाल बढ़ाने के बजाय महानिबंधक ने 14 सितंबर को कई जिलों के प्रधान न्यायाधीशों को नई तदर्थ नियुक्तियां करने का निर्देश दिया है। अधिवक्ता ने दलील दी कि एक तदर्थ नियुक्ति को दूसरी तर्दथ नियुक्ति से नहीं बदला जा सकता।

परिवार न्यायालय अधिनियम के तहत सरकार को नियुक्ति नियमावली बनानी है, जो अब तक नहीं बनी है। कोर्ट ने सरकार से यह भी बताने को कहा है कि काउंसलर की संख्या में कितनी वृद्धि की गई है। याचिका लंबित रहने तक काम प्रभावित न हो, इसलिए याचीगण को कार्य जारी रखने की अनुमति दी गई है।

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