कौशांबी में चायल के पूर्व भाजपा विधायक संजय गुप्ता को इलाहाबाद HC की नोटिस, विपक्षी के खिलाफ केस कार्रवाई पर रोक
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कौशांबी के चायल के पूर्व भाजपा विधायक संजय गुप्ता से जुड़े एक आपराधिक मामले में उनके ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट की फाइल फोटो।
HighLights
कैंट थाने में पूर्व विधायक ने दर्ज कराया था मुकदमा
हाई कोर्ट में जांच में देरी की दलील मजबूती से रखी
विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कौशांबी में चायल के पूर्व भाजपा विधायक संजय गुप्ता से जुड़े एक आपराधिक मामले में याची विपक्षी को बड़ी राहत दी है। न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान की एकलपीठ ने विकास गुप्ता उर्फ विकास कुमार गुप्ता के खिलाफ कैंट थाने में दर्ज केस की पूरी कार्रवाई और मजिस्ट्रेट कोर्ट के समन आदेश पर नौ दिसंबर तक रोक लगा दी है। कोर्ट ने राज्य सरकार और शिकायतकर्ता पूर्व विधायक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
जानें क्या है पूरा मामला?
मामला वर्ष 2021 का है। तत्कालीन भाजपा विधायक संजय गुप्ता ने आरोप लगाया था कि विकास गुप्ता पारिवारिक संपत्ति विवाद को लेकर उनके आवास पर आए और बातचीत की मोबाइल से रिकॉर्डिंग कर उनकी राजनीतिक छवि खराब करने की कोशिश की। इसी आधार पर कैंट थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी। याची के वकील शचिन्द्र कुमार मिश्रा ने दलील दी कि यह केस राजनीतिक रंजिश और पारिवारिक विवाद के चलते दर्ज किया गया है। याची का अपने भाई-भाभी से संपत्ति विवाद है और भाभी के चाचा होने के नाते पूर्व विधायक ने रसूख का इस्तेमाल किया।
कोर्ट में दिया गया तर्क
अदालत में कहा गया कि सिर्फ मोबाइल से रिकार्डिंग करने से धारा 506 के तहत आपराधिक धमकी का केस नहीं बनता। सुप्रीम कोर्ट के मानिक तनेजा बनाम कर्नाटक राज्य के फैसले का हवाला दिया गया। सबसे बड़ी खामी जांच में देरी को बताया गया। वकील ने कहा कि पुलिस ने 2021 में ही चार्जशीट तैयार कर ली थी, लेकिन पांच साल तक उसे दबाए रखा। हाई कोर्ट में जब याचिका दायर हुई तब 28 जुलाई 2026 को चार्जशीट पेश की गई और 20 अगस्त 2026 को अधीनस्थ अदालत ने समन जारी कर दिया। इतनी देरी अनुच्छेद 21 के तहत त्वरित न्याय के अधिकार का उल्लंघन है। कोर्ट ने दलीलों को गंभीर मानते हुए कार्रवाई पर रोक लगा दी है।
