APO प्रारंभिक परीक्षा विवाद: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मुख्य परीक्षा का परिणाम घोषित करने पर लगाई रोक, फैसला सुरक्षित
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सहायक अभियोजन अधिकारी (APO) मुख्य परीक्षा के परिणाम घोषित करने पर रोक लगा दी है और ...और पढ़ें

इलाहाबाद उच्च न्यायालय।
HighLights
अगले आदेश यानी फैसला सुनाए जाने तक मुख्य परीक्षा परिणाम घोषित न करने का निर्देश
अभ्यार्थियों की याचिका में एपीओ प्रारंभिक परीक्षा-2025 के परिणाम को चुनौती दी है
विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सहायक अभियोजन अधिकारी (एपीओ) भर्ती परीक्षा से जुड़े मामले में फैसला सुरक्षित कर लिया है। कोर्ट ने यूपी लोक सेवा आयोग को निर्देश दिया है कि अगले आदेश यानी फैसला सुनाए जाने तक मुख्य परीक्षा का परिणाम घोषित नहीं किया जाए।
याचिका की सुनवाई के बाद निर्णय सुरक्षित
न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम की एकल पीठ ने याचिका पर सुनवाई के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया। पंकज वर्मा और दो अन्य अभ्यार्थियों की याचिका में एपीओ प्रारंभिक परीक्षा-2025 के परिणाम को चुनौती दी है, जो 30 अप्रैल 2026 को घोषित हुआ था। साथ ही आयोग के 9 जनवरी 2020 के कार्यालय ज्ञापन को भी रद करने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ताओं का क्या कहना है?
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ओबीसी वर्ग के जिन मेधावी आरक्षित अभ्यर्थियों ने अनारक्षित सामान्य श्रेणी की कट-ऑफ से अधिक अंक पाए, उन्हें सामान्य श्रेणी में नहीं गिना गया। याचियों का कहना है कि 9 जनवरी 2020 के कार्यालय ज्ञापन और प्रारंभिक परीक्षा परिणाम को रद किया जाए ,उस हद तक, जहां एमआरसी अभ्यर्थियों को सामान्य श्रेणी में नहीं गिना गया।
याचिका में यह भी मांग की गई है
आयोग को निर्देश दिया जाय कि आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों को सामान्य श्रेणी में शामिल कर नया परिणाम घोषित करे और उसी के अनुसार मुख्य परीक्षा कराए। आयोग उन ओबीसी अभ्यर्थियों के अंकों का रिकॉर्ड न्यायालय में पेश करे, जिन्होंने सामान्य श्रेणी के कट-ऑफ से अधिक अंक पाए पर सामान्य श्रेणी में नहीं गिने गए। सभी श्रेणियों की कट-ऑफ से संबंधित रिकॉर्ड भी न्यायालय में पेश किया जाए।
पक्षकारों को एक सप्ताह की छूट मिली
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अनुराग त्रिपाठी ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि मुख्य परीक्षा संपन्न हो चुकी है और परिणाम जल्द घोषित होने की संभावना है। राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल स्थायी अधिवक्ता गौरव सिंह के साथ और लोक सेवा आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी अधिवक्ता अवनीश त्रिपाठी के साथ उपस्थित रहे। सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने पक्षकारों को एक सप्ताह के भीतर लिखित बहस दाखिल करने की भी छूट दी है। साथ ही निर्णय सुरक्षित कर लिया।
