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'दोषी पाए जाने के बाद भी पद पर बने रहना प्रशासन की घोर निष्क्रियता', एटा भ्रष्टाचार मामले में हाई कोर्ट ने की सख्त टिप्पणी

By Jagran NewsEdited By: Shiv Govind Mishraa
Published: Sat, 10 Oct 2026 03:30 AM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एटा में भ्रष्टाचार मामले में प्रशासन की निष्क्रियता पर कड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने दोषी ...और पढ़ें

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HighLights

  1. एटा भ्रष्टाचार मामले में हाई कोर्ट ने की कड़ी टिप्पणी।

  2. दोषी प्रशासक के पद पर बने रहने को निष्क्रियता बताया।

  3. कोर्ट ने प्रशासक को हटाने और ब्योरा मांगा।

विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एटा में भ्रष्टाचार के मामले में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि जांच में दोषी पाए जाने के बावजूद अधिकारियों का पद पर बने रहना प्रशासन की घोर निष्क्रियता और व्यवस्था की गंभीर शिथिलता है।

मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने रामकुमार की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान आश्चर्य जताया कि 27 नवंबर 2024 को क्षेत्र पंचायत प्रशासक को दोषी ठहराने वाली रिपोर्ट दो साल बाद जिलाधिकारी के संज्ञान में आई।याचिका में एटा के क्षेत्र पंचायत प्रशासक पर भ्रष्टाचार और अनियमितता के गंभीर आरोप लगाए थे। सुनवाई में कोर्ट ने पाया कि रिपोर्ट आने के बावजूद लंबे समय तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। सरकारी वकील ने बताया कि अब प्रशासक को हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई है।

हालांकि प्रशासक पर अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर और नियुक्ति शर्तों का उल्लंघन कर बड़े नीतिगत फैसले लेने के आरोपों पर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई। कोर्ट ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई से पहले प्रशासक को पद से हटाया जाए और उसके कार्यकाल की सभी गतिविधियों का पूरा ब्योरा पेश किया जाए।

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साथ ही 2024 की जांच रिपोर्ट के आधार पर वित्तीय गबन की वसूली के लिए क्या कदम उठाए गए, यह भी बताया जाए। अगली सुनवाई चार नवंबर को होगी।