ट्रांसजेंडर महिला पर BNS की धारा 69 लागू नहीं, इलाहाबाद HC ने शादी का झांसा देकर संबंध बनाने के आरोपित को जमानत
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि ट्रांसजेंडर महिला पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 लागू नहीं होती, ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट की फाइल फोटो।
HighLights
कोर्ट ने बरेली के इज्जतनगर थाने में दर्ज FIR के क्रम में दायर जमानत अर्जी पर यह आदेश दिया
ट्रांसजेंडर का आरोपित साकिर ने शादी का वादा कर डेढ़ साल तक उससे संबंध बनाने का आरोप
विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि ट्रांसजेंडर महिला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 69 के तहत ‘महिला’ की परिभाषा में नहीं आती। इसलिए शादी का झांसा देकर यौन संबंध बनाने से जुड़ी यह धारा उनके मामले में लागू नहीं होगी। अदालत ने इसी आधार पर बरेली के मोहम्मद साकिर उर्फ साकिर को जमानत दे दी है।
न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकलपीठ ने बरेली के इज्जतनगर थाने में दर्ज एफआईआर के क्रम में दायर जमानत अर्जी पर यह आदेश दिया है। एफआईआर के अनुसार शिकायतकर्ता ट्रांसजेंडर महिला है। उनका जन्म पुरुष के रूप में हुआ था और 11 अप्रैल 2023 को सर्जरी के बाद वह महिला बनी। आरोपित साकिर ने शादी का वादा कर डेढ़ साल तक उससे संबंध रखा, पांच लाख रुपये से अधिक लिए और बाद में शादी से इन्कार कर दिया।
आरोपित आवेदक के वकील ने दलील दी कि बीएनएस की धारा 2(35) में ‘महिला’ का अर्थ महिला मानव है, जबकि धारा 2(10) में ट्रांसजेंडर को अलग लिंग माना गया है। ट्रांसजेंडर व्यक्ति अधिनियम, 2019 की धारा 2(के) के अनुसार लिंग परिवर्तन सर्जरी के बाद भी व्यक्ति ट्रांसजेंडर ही रहता है।
मेडिकल पैनल रिपोर्ट में भी शिकायतकर्ता को बिना गर्भाशय बदले हुए जननांग वाला पुरुष बताया गया है। राज्य सरकार की तरफ से जमानत अर्जी का विरोध किया। एमिकस क्यूरी मयूरी मेहरोत्रा ने आंध्रप्रदेश और उत्तराखंड हाई कोर्ट के फैसलों का हवाला दिया।
अदालत ने हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के भूपेश ठाकुर मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि बीएनएस में महिला और ट्रांसजेंडर की अलग पहचान है। ट्रांसजेंडर व्यक्ति के यौन शोषण के लिए अधिनियम की धारा 18(डी) में विशेष प्रावधान है, जिसमें दो साल तक की सजा है। अदालत ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता ने मेडिकल जांच से इन्कार किया था। आरोपित को शर्तों के साथ जमानत दी गई है।
