असिस्टेंट प्रोफेसर को तीन माह का नोटिस देकर हटाना गलत, इलाहाबाद HC ने प्रयागराज के मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी की
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नेहरू ग्राम भारती मानित विश्वविद्यालय द्वारा असिस्टेंट प्रोफेसर को तीन माह के नोटिस पर हटाने को ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट।
HighLights
हाई कोर्ट ने नेहरू ग्राम भारती मानित विश्वविद्यालय की चयन प्रक्रिया पर लगाई रोक
कोर्ट ने सभी विपक्षियों को चार सप्ताह में जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया
याचिका में कहा गया- विवि ने यूजीसी पे-बैंड मांगने पर एकतरफा बर्खास्तगी आदेश दिया
विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नेहरू ग्राम भारती मानित विश्वविद्यालय द्वारा नियमित असिस्टेंट प्रोफेसर की सेवा को केवल तीन महीने के नोटिस पर समाप्त करने को प्रथम दृष्टया गलत माना है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकलपीठ ने अभिषेक मिश्रा की याचिका पर सुनवाई करते हुए 27 जुलाई 2026 को जारी असिस्टेंट प्रोफेसर, पत्रकारिता एवं जनसंचार पद के विज्ञापन से संबंधित चयन प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी है।
एकतरफा बर्खास्तगी आदेश
याचिका में कहा गया है कि याची की नियुक्ति 31 अक्टूबर 2020 को चयन समिति की संस्तुति और कुलपति के अनुमोदन से नियमित पद पर हुई थी। विश्वविद्यालय ने यूजीसी पे-बैंड मांगने पर 18 जुलाई 2026 को एकतरफा बर्खास्तगी आदेश जारी कर दिया है।
विश्वविद्यालय के अधिवक्ता का तर्क...
विश्वविद्यालय की ओर से अधिवक्ता ने तर्क दिया कि स्थायी कर्मचारियों को तीन महीने और अस्थायी को एक महीने का नोटिस देकर हटाने का नियम है, लेकिन कोर्ट के पूछने पर वह इस संबंध में कोई नियम प्रस्तुत नहीं कर सकीं। कोर्ट ने कहा कि एक बार नियुक्ति नियमित हो जाने पर केवल तीन महीने का नोटिस देकर सेवा समाप्ति का आदेश मान्य नहीं हो सकता।
कोर्ट ने विपक्षियों से जवाबी हलफनामा मांगा
कोर्ट ने सभी विपक्षियों को चार सप्ताह में जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। याचिका में यह भी मांग की गई कि याची को हर महीने नियमित वेतन का भुगतान किया जाए। जब तक अंतिम फैसला नहीं आता यथास्थिति बनाए रखी जाए। कोर्ट में याची की विश्वविद्यालय में ज्वाइनिंग को लेकर भी सहमति बनी। याची ने कहा कि वह काम करने को तैयार है।
