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इलाहाबाद HC ने पांच डॉक्टरों को सरकारी अस्पतालों में सेवा बांड से राहत दी, कुछ माह और सेवा देने की लगाई शर्त

By Sharad Dwivedi Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Sun, 20 Sep 2026 03:02 PM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पांच डॉक्टरों को सेवा बांड से राहत दी है, लेकिन उन्हें सरकारी अस्पतालों में कुछ और ...और पढ़ें

इलाहाबाद उच्च न्यायालय।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय।

HighLights

  1. कोर्ट ने कहा- योग्य डॉक्टरों का सरकारी अस्पतालों में कुछ समय सेवा देना जनहित में आवश्यक

  2. याचियों का कहना था कि बांड की शर्तें उसी शासनादेश से तय होंगी जो बांड भरते समय लागू था

विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कविता यादव व चार अन्य डॉक्टरों को उनके सेवा बांड से मुक्त करने का आदेश दिया है, लेकिन इसके लिए उन्हें कुछ महीने और सरकारी अस्पतालों में सेवा देनी होगी। याचिकाकर्ता पांचों डॉक्टरों ने वर्ष 2018-19 में किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ (एक को छोड़कर, जिसने डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज से पीजी किया) से पीजी कोर्स में दाखिला लिया था।

दाखिले के समय उन्होंने बांड भरा था कि पीजी पूरा करने के बाद दो साल तक राज्य की सेवा करेंगे। 7 मार्च 2018 के शासनादेश के अनुसार, यदि कोई अभ्यर्थी बाद में सुपर-स्पेशियलिटी कोर्स में चयनित होता है, तो उसे बांड से मुक्त कर दिया जाएगा।

पीजी पूरा करने और कुछ समय सेवा देने के बाद इन डॉक्टरों का चयन सुपर-स्पेशियलिटी डिप्लोमा कोर्स में हो गया, जिसके बाद उन्होंने बांड से मुक्ति की मांग की। हालांकि 23 मार्च 2026 के आदेश से उनकी अर्जी खारिज कर दी गई, क्योंकि 5 जनवरी 2022 के संशोधित शासनादेश में स्पष्ट किया गया था कि "उच्च शिक्षा" की छूट केवल एमडी/एमएस कोर्स के लिए ही मान्य होगी, डिप्लोमा कोर्स के लिए नहीं। याचियों का कहना था कि बांड की शर्तें उसी शासनादेश से तय होंगी जो बांड भरते समय लागू था, और बाद में आया कोई भी संशोधित आदेश पूर्वप्रभावी रूप से याचियों को नुकसान नहीं पहुंचा सकता।

9 सितंबर 2026 को कोर्ट ने डॉक्टरों से यह जानने को कहा था कि क्या वे कम से कम 6 महीने से 1 साल तक सरकारी अस्पतालों में काम करने को तैयार हैं। जवाब में दाखिल शपथपत्र के अनुसार, चार डॉक्टर (कविता यादव, नीरज गौतम, कनिका बंसल, प्रेरणा प्रभात दास) 6 माह और सेवा देने को तैयार थे, जबकि डॉ. यतेंद्र कुमार पहले ही 18 महीने से अधिक सेवा दे चुके थे और उन्होंने आगे सेवा से छूट मांगी।

न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने कहा कि डॉ. कविता यादव, डॉ. नीरज गौतम 6 महीने और सेवा देंगे। डॉ. प्रेरणा प्रभात दास, डॉ. कनिका बंसल 9 महीने और सेवा देंगी। डॉ. यतेंद्र कुमार केवल तीन महीने और सेवा देंगे। निर्धारित अवधि पूरी होने पर सभी को बांड से मुक्त कर दिया जाएगा।

कोर्ट ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में योग्य डॉक्टरों का सरकारी अस्पतालों में कुछ समय सेवा देना जनहित में आवश्यक है। सभी याचिकाकर्ताओं को 2 नवंबर 2026 को अपने-अपने पूर्व संस्थानों में रिपोर्ट करने और वर्तमान योग्यता के अनुसार ड्यूटी लेने का निर्देश दिया गया है। इसी के साथ याचिका का निस्तारण कर दिया गया।

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