पदोन्नति से वंचित चैनमैन के खिलाफ 12 साल बाद शुरू विभागीय जांच पर रोक, इलाहाबाद HC ने DM बरेली से मांगा जवाब
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने चैनमैन हरिओम सिंह के खिलाफ 12 साल बाद शुरू हुई विभागीय जांच पर रोक लगा दी ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट।
HighLights
चैनमैन (जमीन की नापजोख करने वाले) पर 2015 में विभागीय कार्यवाही शुरू की गई थी
हाई कोर्ट ने दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए, अगली सुनवाई 28 सितंबर को
विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पदोन्नति से वंचित रहे चैनमैन (जमीन की नापजोख करने वाले) हरिओम सिंह के खिलाफ 12 साल बाद शुरू हुई विभागीय जांच कार्यवाही पर रोक लगा दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम की एकलपीठ ने याची के अधिवक्ता सैयद वाजिद अली को सुनकर दिया है।
बरेली जिले का मामला
बरेली जिले की सदर तहसील में तैनात चैनमैन के विरुद्ध वर्ष 2015 में मीरगंज तहसील में तैनाती के दौरान उप जिलाधिकारी द्वारा विभागीय कार्यवाही शुरू की गई थी। इसके लिए कारण बताओ नोटिस नियमानुसार तत्काल न देकर पूरे 12 वर्ष विलंब के बाद 25 जून 2026 को तामील कराया गया था।
डीएम ने कनिष्ठ चैनमैनों को पदोन्नत किया था
लंबित विभागीय कार्यवाही की आड़ लेकर जिलाधिकारी ने चार जून 2026 को हरिओम सिंह से कनिष्ठ आठ चैनमैनों को लेखपाल पद पर पदोन्नत कर दिया गया था, जबकि पात्रता सूची में वरिष्ठ होने के बावजूद याची का प्रमोशन रोक दिया गया।
इसलिए याचिका दायर की गई
प्रमोशन से वंचित किए जाने और 12 साल पुराने मामले में नोटिस के विरुद्ध याचिका दायर की गई। याचिका में विभागीय कार्यवाही निरस्त करने और कनिष्ठों की पदोन्नति तिथि (04 जून 2026) से ही हरिओम सिंह को भी लेखपाल पद पर प्रमोशन देने की मांग की गई है।
कोर्ट ने सवाल किए?
कोर्ट ने जिलाधिकारी से पूछा है कि सात मई 2015 का कारण बताओ नोटिस 12 वर्ष बीत जाने के बाद 25 जून 2026 को क्यों प्राप्त कराया गया? इस संबंध में दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए कोर्ट ने अगली सुनवाई 28 सितंबर 2026 को नियत की है। तब तक के लिए याची के विरुद्ध चल रही समस्त विभागीय कार्यवाहियों पर पूर्णतः रोक लगा दी गई है।
