लखनऊ डॉयोसेसन ट्रस्ट विवाद: UK HC के पूर्व न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह बने प्रशासक, प्रबंधन से जुड़े मामले सुलझाएंगे
एनसीएलटी प्रयागराज ने लखनऊ डॉयोसेसन ट्रस्ट एसोसिएशन के प्रबंधन विवादों को सुलझाने के लिए उत्तराखंड हाई कोर्ट के पूर्व न्यायमूर्ति ...और पढ़ें
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राष्ट्रीय कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) की फाइल फोटो।
HighLights
एनसीएलटी प्रयागराज बोर्ड ऑफ डॉयरेक्टर्स की शक्तियां भी निलंबित
राष्ट्रीय कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) की इलाहाबाद बेंच का फैसला
उत्तराखंड HC के पूर्व न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह 1 वर्ष के लिए बने प्रशासक
विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। राष्ट्रीय कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) की इलाहाबाद बेंच ने लखनऊ डॉयोसेसन ट्रस्ट एसोसिएशन से जुड़े प्रबंधन विवाद को सुलझाने के लिए उत्तराखंड हाई कोर्ट के पूर्व न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह को एक वर्ष की अवधि के लिए स्वतंत्र प्रशासक नियुक्त किया है। इसके साथ ही सभी प्रतिद्वंद्वी गुटों के बोर्ड आफ डॉयरेक्टर्स की शक्तियां तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दी हैं। ट्रिब्यूनल ने यह आदेश 16 सितंबर 2026 को पारित किया है।
ट्रस्ट नौ अगस्त 1924 को कंपनी अधिनियम 1913 के तहत गारंटी द्वारा सीमित कंपनी के रूप में स्थापित किया गया था। इसका उद्देश्य लखनऊ डॉयोसीज में चर्च ऑफ इंग्लैंड के धार्मिक, दान और संस्थागत कार्यों को संचालित करना था। पिछले कई वर्षों से ट्रस्ट के वैध प्रबंधन और प्रतिनिधित्व को लेकर जान आगस्टीन, स्वप्ना आगस्टीन, विजय कुमार राबिन्सन सहित कई गुटों में विवाद चल रहा है।
कंपनी रजिस्ट्रार कानपुर की 11 मई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार ट्रस्ट की अंतिम बैलेंस शीट 2008 में और अंतिम वार्षिक रिटर्न 2011 में दाखिल हुई थी। दो जुलाई 2012 से कंपनी को कार्पोरेट कार्य मंत्रालय के पोर्टल (एमसीए) पर ‘प्रबंधन विवाद’ के रूप में फ्लैग किया गया है, जिसके कारण कोई भी नई फाइलिंग स्वीकार नहीं हो रही थी।
ट्रिब्यूनल ने कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 242(4) के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह आदेश दिया है। ट्रिब्यूनल ने कहा है कि 23 जनवरी 2018 का यथास्थिति बनाए रखने का आदेश यथावत रहेगा। ट्रिब्यूनल की अनुमति के बिना ट्रस्ट की किसी भी संपत्ति की बिक्री, हस्तांतरण या बंधक पर पूर्ण रोक रहेगी।
प्रशासक सभी बैंक खातों का संचालन करने के साथ ही लंबित सांविधिक फाइलिंग पूरी करेंगे। उन्हें दो महीने में सदस्यता की स्थिति पर और तीन महीने में व्यापक रिपोर्ट ट्रिब्यूनल में पेश करनी होगी। सभी पक्षों को प्रशासक के साथ पूर्ण सहयोग करना अनिवार्य होगा।
ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि यह नियुक्ति किसी गुट के दावे पर अंतिम निर्णय नहीं है, बल्कि विवाद के समाधान तक ट्रस्ट की संपत्तियों और कामकाज की सुरक्षा के लिए अंतरिम व्यवस्था है। इस मामले में अगली सुनवाई 24 सितंबर 2026 को होगी।
