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ओबीसी आरक्षण: डेटा जुटाने की प्रक्रिया पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उठाए सवाल, 14 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

Published: Sat, 10 Oct 2026 05:20 AM (GMT+05:30)Updated: Sat, 10 Oct 2026 05:38 AM (GMT+05:30)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्थानीय निकाय चुनावों के लिए ओबीसी आरक्षण हेतु डेटा जुटाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। ...और पढ़ें

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

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HighLights

  1. हाई कोर्ट ने ओबीसी आरक्षण डेटा प्रक्रिया पर सवाल उठाए।

  2. आयोग द्वारा कम लोगों के बयान दर्ज होने पर चिंता व्यक्त की।

  3. कोर्ट ने 14 अक्टूबर तक विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।

विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रदेश में स्थानीय निकायों, ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य के चुनावों के लिए ओबीसी आरक्षण का आधार बनने वाले आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने दशरथ यादव की याचिका पर सुनवाई के दौरान संबंधित आयोग से जानकारी मांगी।

पिछड़ा वर्ग आयोग की ओर से बताया गया कि 40 जिलों में आंकड़े जुटाने का काम पूरा हो चुका है और बाकी जिलों में प्रक्रिया जल्द पूरी कर ली जाएगी। कोर्ट ने कहा कि आयोग के समक्ष पहुंचने वाले लोगों की संख्या वास्तविक आबादी की तुलना में बहुत कम है। आगरा जिले में तीन लाख से अधिक ओबीसी आबादी होने के बावजूद आयोग के समक्ष केवल 179 लोग पहुंचे और उनमें से महज 29 के बयान दर्ज किए गए।

कोर्ट ने यह भी किया रेखांकित

खंडपीठ ने पूछा कि जातिवार सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक पिछड़ेपन का आकलन किस तरह किया जा रहा है। कोर्ट ने कहा- अखबारों में नोटिस प्रकाशित कराने के बाद भी इतने कम लोगों के बयान दर्ज होना पर्याप्त और प्रामाणिक डेटा जुटाने के लिए उचित नहीं दिखता। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि आयोग करीब पांच महीने से यह काम कर रहा है, लेकिन उसके गठन के बाद बनी सलाहकार समिति की अब तक आयोग के साथ एक भी बैठक नहीं हुई।

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खंडपीठ ने आयोग से स्पष्ट करने को कहा है कि छह महीने की तय समयसीमा में पूरे प्रदेश का काम किस तरह पूरा किया जाएगा। आयोग को यह भी बताना होगा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसलों डाक्टर के. कृष्णमूर्ति बनाम भारत संघ और सुरेश महाजन बनाम मध्य प्रदेश राज्य में निर्धारित ‘ट्रिपल टेस्ट’ के तहत ओबीसी जातियों के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक पिछड़ेपन का एम्पिरिकल डेटा कैसे जुटाया गया और उसका आकलन किस प्रकार किया जाएगा? कोर्ट ने आगरा जिले में किए गए काम का विस्तृत विवरण 14 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे तक पेश करने का निर्देश आयोग को दिया है।