जीवित व्यक्ति का मृत्यु प्रमाणपत्र बना पहेली: हाईकोर्ट ने पूछा- CDO को किस अधिकार से था प्रमाणपत्र जारी करने का हक?
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बलिया निवासी हरिहर शर्मा के जीवित रहते जारी मृत्यु प्रमाणपत्र पर सवाल उठाए हैं, खासकर मुख्य ...और पढ़ें

HighLights
जीवित व्यक्ति हरिहर शर्मा का मृत्यु प्रमाणपत्र जारी हुआ।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सीडीओ के अधिकार पर सवाल उठाए।
बेटों के बयानों में विरोधाभास, संपत्ति विवाद का आरोप।
विधि संवाददाता, प्रयागराज। बलिया निवासी हरिहर शर्मा के जीवित रहते जारी किया गया उनका मृत्यु प्रमाणपत्र पहेली बन गया है। दो जिलाधिकारियों की रिपोर्ट देखने के बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पूछा है कि क्या मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) को मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकार था और यह किस विधिक अधिकार से किया गया?
न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने याची हरिहर शर्मा और उनके बेटों ईश्वर चंद्र व प्रकाश कुमार शर्मा के बयान दर्ज करने के बाद अगली सुनवाई 19 नवंबर को नियत की है।याची ने खुद को रामसुंदर शर्मा का पुत्र बताया है। उनके अनुसार, पहला विवाह प्रभावती देवी से 1962 में हुआ, जिससे बेटा ईश्वर चंद्र है। दूसरा विवाह पशुपति देवी से 1967 में हुआ, जिससे बेटा प्रकाश कुमार शर्मा है। बेटी मंजू भी है।
वह 1967 में रोजगार के लिए रांची चले गए थे। मूल रूप से बलिया के निवासी हैं, जबकि ननिहाल की संपत्ति गाजीपुर के देहमा में है। उन्होंने प्राथमिक से बीएससी तक की पढ़ाई बलिया से की और गाजीपुर में वोट डालते हैं। ईश्वर चंद्र ने खुद को अनपढ़ बताते हुए कहा कि उनका जन्म 1994 में हुआ और पिता की मृत्यु 1991 में हो गई थी। उस समय वह 8-10 साल के थे। मां प्रभावती देवी की मृत्यु 7-8 साल पहले हुई। प्रकाश कुमार शर्मा ने अपना जन्म 1986 में रांची में बताया और कहा कि उन्होंने वहीं स्नातक किया।
उनके अनुसार, पिता 1980 से रांची में रह रहे थे और उनका विवाह उनकी मां से 1982-83 में हुआ था। बेटों के बयानों में पिता की उम्र, विवाह की तारीख को लेकर विरोधाभासों को कोर्ट ने गंभीरता से लिया। बलिया के जिलाधिकारी की रिपोर्ट के अनुसार, पांच सदस्यीय कमेटी ने हरिहर शर्मा के बयान को सही पाया। इसमें कहा गया कि प्रभावती देवी के आवेदन पर मृत्यु प्रमाणपत्र जारी हुआ और उन्होंने यह बात छिपाई कि हरिहर शर्मा 30-32 साल से लापता थे।
सिविल डेथ की घोषणा जरूरी थी, जो नहीं की गई। रिपोर्ट में पिता-पुत्र के डीएनए टेस्ट की सिफारिश की गई। गाजीपुर के जिलाधिकारी की रिपोर्ट में भी यही राय दी गई, हालांकि उसमें कहा गया कि हरिहर शर्मा ने आधार, वोटर आईडी और बैंक पासबुक जैसे हालिया दस्तावेज दिए, पुराना दस्तावेज नहीं। कोर्ट ने पाया कि नौ फरवरी 2021 के आवेदन पर सीएमओ बलिया से जांच कराई गई।
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मुख्य विकास अधिकारी ने केवल ‘आवश्यक कार्यवाही करें’ लिखकर मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करा दिया। याची ने प्रमाणपत्र रद करने की मांग की है। उनका आरोप है कि ईश्वर चंद्र ने उन्हें 1991 में मृत दिखाकर मार्च 2021 में फर्जी प्रमाणपत्र बनवाया और उनके नाम की जमीन बेच दी।
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