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कानपुर के बस कंडक्टर को इलाहाबाद HC से राहत, बर्खास्तगी रद; कोर्ट ने कहा- सुनवाई का अवसर देना जरूरी

By Suresh pandey Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Mon, 02 Nov 2026 06:24 PM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कानपुर के बस कंडक्टर राजेश कुमार दीक्षित की बर्खास्तगी रद्द कर दी है। कोर्ट ने सुनवाई ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट।

इलाहाबाद हाई कोर्ट।

HighLights

  1. हाई कोर्ट का नए सिरे से अनुशासनात्मक कार्यवाही पूरी करने का आदेश 

  2. कोर्ट ने सुनवाई का अवसर न देने को गलत बताया।

विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के कंडक्टर की सेवा समाप्ति का आदेश रद कर दिया है। न्यायमूर्ति दिनेश पाठक की एकलपीठ ने कानपुर नगर निवासी राजेश कुमार दीक्षित की याचिका पर यह फैसला सुनाया है।

याची व निगम के अधिवक्ताओं का तर्क 

याची के अधिवक्ता घनश्याम मौर्य ने कहा कि सुनवाई का अवसर दिए बिना सेवा समाप्ति का आदेश पारित किया गया। निगम के अधिवक्ता विनय कुमार तिवारी ने दलील दी कि याची को सुनवाई के लिए बुलाया गया था, लेकिन वह जांच अधिकारी या अनुशासनिक प्राधिकारी के सामने उपस्थित नहीं हुए। नोटिस रजिस्टर्ड डाक से भेजा गया था, जो ‘इन्कार’ की टिप्पणी के साथ लौट आया।

कोर्ट ने कहा कि आदेश एकतरफा पारित हुआ 

हाई कोर्ट ने कहा कि रिकार्ड से स्पष्ट है कि आदेश एकतरफा पारित हुआ और याची को प्रभावी व उचित सुनवाई का अवसर नहीं मिला। सेवा से हटाना बड़ी सजा है, फिर भी मौखिक जांच का मौका नहीं दिया गया। पक्षकारों की सहमति से हलफनामे मंगाए बिना याचिका का अंतिम निस्तारण करते हुए कोर्ट ने बर्खास्तगी आदेश रद कर मामला क्षेत्रीय प्रबंधक को वापस भेज दिया। उन्हें आरोप-पत्र के चरण से अनुशासनात्मक कार्यवाही नए सिरे से शुरू करने की छूट दी गई है।

जवाब 16 दिसंबर तक दाखिल करना होगा

याची 16 नवंबर 2026 को क्षेत्रीय प्रबंधक कार्यालय में उपस्थित होंगे। उसी दिन उन्हें आरोप-पत्र, संबंधित दस्तावेज और गवाहों की सूची, यदि कोई हो, उपलब्ध कराई जाएगी। जवाब 16 दिसंबर 2026 तक दाखिल करना होगा। इसके बाद जांच अधिकारी या अनुशासनिक प्राधिकारी उचित सुनवाई का अवसर देकर तीन माह में कार्यवाही पूरी करने का हरसंभव प्रयास करेंगे।

याची को पूरा सहयोग करना होगा 

याची को पूरा सहयोग करना होगा और अनावश्यक स्थगन नहीं मांगना होगा। उनकी ओर से देरी न होने पर भी कार्यवाही में विलंब हो तो प्राधिकारी को तय समय में उसे पूरा करना होगा। जांच के दौरान क्षेत्रीय प्रबंधक याची को निलंबित कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में याची को नियमानुसार जीविका निर्वाह भत्ता मिलेगा। तय अवधि में कार्यवाही पूरी न होने पर निलंबन आदेश यदि कोई हो, स्वतः समाप्त माना जाएगा।

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