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इलाहाबाद HC ने एसी स्लीपर बसों की सुरक्षा पर उठाए सवाल, कहा- बिना उचित जांच व सुरक्षा उपायों के चलाई जा रही

By Suresh pandey Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Fri, 25 Sep 2026 08:03 PM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस में आग लगने से हुई मौतों का स्वतः संज्ञान लेते हुए ...और पढ़ें

इलाहाबाद उच्च न्यायालय।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय।

HighLights

  1. यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस में आग से नौ मौतों पर मुख्य सचिव-डीजीपी तलब

  2. हादसे को कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर जनहित याचिका दर्ज की, राज्य सरकार को निर्देश

विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस में आग लगने से नौ यात्रियों की मौत मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए शुक्रवार को मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से तलब किया। न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकलपीठ ने जनहित याचिका दर्ज कर राज्य सरकार को कई निर्देश भी दिए।

चालकों-परिचालकों को उचित प्रशिक्षण नहीं दिया जाता

हाई कोर्ट ने कहा है कि प्रदेश में एसी स्लीपर बसें बिना उचित जांच और सुरक्षा उपायों के चलाई जा रही हैं। चालकों और परिचालकों को आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए उचित प्रशिक्षण भी नहीं दिया जाता है। कोर्ट ने 25 सितंबर 2026 को प्रकाशित समाचारों का हवाला देते हुए कहा कि ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में हुई इस घटना में नौ यात्रियों की जलकर मौत हो गई।

कोर्ट ने पूर्व की घटनाओं का किया उल्लेख 

कोर्ट ने पूर्व में हुई ऐसी अन्य दुर्घटनाओं का उल्लेख किया, जिनमें जुलाई 2023 में रायबरेली-प्रयागराज-लखनऊ हाईवे पर तीन, नवंबर 2024 में कन्नौज-लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर चार और दिसंबर 2025 में यमुना एक्सप्रेसवे पर 13 मौतें शामिल हैं। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री द्वारा राज्यसभा में साझा आंकड़ों का भी उल्लेख किया, जिसमें बताया गया है कि जनवरी 2023 से 10 दिसंबर 2025 तक देशभर में परिवहन वाहनों में लगभग 45 अग्निकांड हुए, जिनमें 64 यात्रियों की मौत हुई और 145 घायल हुए।

वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित हुए अधिकारी 

मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और अपर मुख्य सचिव (परिवहन) ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट के समक्ष उपस्थित होकर कृत कार्रवाई की जानकारी दी। कोर्ट ने बसों की नियमित जांच में सुधार की आवश्यकता जताई। न्यायमित्र और कोर्ट के शोध सहयोगियों ने बताया कि बसों के लिए एआईएस -052 (बाडी डिजाइन), एआइएस -119 (स्लीपर कोच मानक) और एआइएस -135 (अग्नि सुरक्षा) जैसे मानक अनिवार्य हैं।

मुख्य सचिव ने रात में जांच अभियान चलाने को कहा

कोर्ट ने कहा, यदि दुर्घटनाग्रस्त बस ने इन मानकों का पालन नहीं किया तो चालक-परिचालक के साथ ही लाइसेंसधारी के विरुद्ध भी कार्रवाई की जाए। मुख्य सचिव ने रात में विशेष जांच अभियान चलाने का आश्वासन दिया। कोर्ट ने राज्य सरकार को ऐसा हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें पिछले तीन वर्षों में जारी परमिट, जांच प्रक्रिया, सीमा जांच चौकियों, यात्री सुरक्षा जांच और आपराधिक कार्रवाई का विवरण हो। याचिका की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2026 को होगी।

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