गर्भवती युवती को अदालत में 30 सितंबर को पेश करें, इलाहाबाद HC का वृंदावन के नारी निकेतन अधीक्षक को निर्देश
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने वृंदावन के नारी निकेतन में रह रही गर्भवती युवती को 30 सितंबर को अदालत में पेश ...और पढ़ें

इलाहाबाद उच्च न्यायालय।
HighLights
कोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई करते हुए दिया आदेश
इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका युवती के पति किशोर ने दायर की है
विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने वृंदावन स्थित नारी निकेतन में रह रही गर्भवती युवती को 30 सितंबर को अदालत में पेश करने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने किशोर व अन्य की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है।
याचिका पति किशोर ने दायर की है। उसका दावा है कि उसने युवती से विवाह किया है। युवती पाक्सो एक्ट मामले में पीड़िता है। याचिका में आरोप है कि युवती को नारी निकेतन वृंदावन में निरुद्ध रखा गया है। याची के अधिवक्ता रवि शंकर तिवारी ने कोर्ट को बताया कि युवती निरक्षर है और कभी स्कूल नहीं गई, इसलिए उसका कोई शैक्षिक रिकार्ड नहीं है। 27 अप्रैल 2026 को हुए अस्थि परीक्षण (आसिफिकेशन टेस्ट) में उसकी उम्र 17 से 18 वर्ष आंकी गई थी।
बताया कि एफआईआर में भी उसकी उम्र 16-17 वर्ष और स्कूल न जाने का उल्लेख है। युवती ने बीएनएसएस की धारा 183 के तहत बयान में भी यही बात दोहराई है। अधिवक्ता ने दलील दी कि युवती अब बालिग हो चुकी है और करीब नौ माह की गर्भवती है। इस आधार पर उसे कोर्ट में पेश किया जाए। कोर्ट ने प्रार्थना स्वीकार करते हुए नारी निकेतन अधीक्षक को 30 सितंबर को युवती को पेश करने का निर्देश दिया है।
