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इलाहाबाद हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण आदेश, पुलिस और अभियोजन अधिकारियों को मिलेगा फोरेंसिक विज्ञान का प्रशिक्षण

By Sharad Dwivedi Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Sun, 20 Sep 2026 05:28 PM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आपराधिक न्याय प्रणाली में सुधार के लिए पुलिस और अभियोजन अधिकारियों को फोरेंसिक विज्ञान में प्रशिक्षण देने का आदेश दिया है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट।

इलाहाबाद हाई कोर्ट।

HighLights

  1. क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम में तकनीकी सुधारों को लेकर कोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश पारित किया

  2. NIC के डिप्टी DG व यूपी के ADG (टेक्निकल) वीडियो कांफ्रेंसिंग से कोर्ट के सामने पेश हुए 

विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पुलिस और अभियोजन अधिकारियों को प्रशिक्षण देने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने आतिश उर्फ कृष्णकांत की याचिका पर क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम में तकनीकी सुधारों को लेकर यह महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है।

अधिकारियों ने कोर्ट को जानकारी दी

सुनवाई के दौरान एनआइसी नई दिल्ली के डिप्टी डायरेक्टर जनरल शशिकांत शर्मा और यूपी के एडिशनल डायरेक्टर जनरल (टेक्निकल) वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट के सामने पेश हुए। उन्होंने बताया कि चार्जशीट के सर्किल आफिसर द्वारा सत्यापन का विकल्प जोड़ा गया है। मेडलीएपीआर और ई-फारेंसिक लैब रिपोर्ट तक पहुंच पर काम जारी है। पोस्टमार्टम, यौन उत्पीड़न व चोट रिपोर्ट अब सीसीटीएनएस के जरिए पुलिस को सीधे उपलब्ध हैं।

कोर्ट का निर्देश 

कोर्ट ने तिलहर थाना में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू पुलिस केस डायरी तक न्यायालय की पूरी पहुंच वाली व्यवस्था को पूरे उत्तर प्रदेश में लागू करने की निर्देश दिया। फोरेंसिक विज्ञान की जानकारी की कमी के मुद्दे पर कोर्ट ने कहा कि इससे सरकारी वकील मामलों में उचित सहयोग नहीं कर पाते।

कोर्ट ने इनकी सराहना की 

कोर्ट ने प्रयागराज के तत्कालीन पुलिस आयुक्त जोगेंद्र कुमार और बुलंदशहर के जिला जज व एसपी की सराहना की, जिन्होंने मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के सहयोग से फोरेंसिक विज्ञान पर कौशल विकास कार्यशालाएं आयोजित की।

यूपी के प्रमुख सचिव विधि एवं न्याय व डीजीपी को निर्देश 

कोर्ट ने यूपी के प्रमुख सचिव विधि एवं न्याय और डीजीपी को निर्देश दिया कि वे राज्य के सभी सरकारी वकीलों और पुलिस अधिकारियों के लिए नियमित रूप से ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करें, और जिला न्यायाधीशों को भी अपने-अपने जिलों में न्यायिक अधिकारियों के लिए ऐसी कार्यशालाएं कराने को कहा था। अधिकांश निर्देशों का पालन हो जाने के कारण कोर्ट ने 17 सितंबर 2026 को इस मामले का अंतिम निस्तारण कर दिया।

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