UP पंचायत चुनाव पर इलाहाबाद HC का बड़ा फैसला, कहा- ओबीसी के लिए आरक्षित सीटें सामान्य नहीं होंगी
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यूपी पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षित सीटों को सामान्य न करने का निर्देश दिया है। साथ ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट।
HighLights
अधिकतम आरक्षण सीमा 50 प्रतिशत ही रहेगी तीन महीने में प्रक्रिया पूरी करने का आदेश
HC ने प्रदेश में मौजूदा आरक्षण व्यवस्था के तहत ही पंचायत चुनाव कराने का निर्देश दिया
विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रदेश में मौजूदा आरक्षण व्यवस्था के तहत ही पंचायत चुनाव कराने का निर्देश दिया है। कहा है कि राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग तीन माह के भीतर चुनाव प्रक्रिया पूरी कराए। अदालत ने कार्यकाल समाप्त होने के बाद पूर्व प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने के फैसले को भी सही ठहराया है।
दशरथ यादव समेत आठ अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई
न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने दशरथ यादव समेत आठ अन्य की याचिकाओं पर विस्तृत सुनवाई के बाद निर्णय सुनाते हुए कहा कि ओबीसी के लिए आरक्षित सीटों को आयोग की रिपोर्ट लंबित होने के आधार पर सामान्य नहीं किया जा सकता। एससी, एसटी और महिला आरक्षण भी जारी रहेगा, बशर्ते कुल आरक्षण 50 प्रतिशत की सीमा से अधिक न हो।
देर रात हाई कोर्ट की वेबसाइट पर आदेश अपलोड
आदेश देर रात हाई कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड हुआ। इसके अनुसार संविधान के अनुच्छेद 243-ई के तहत पंचायत का कार्यकाल पांच वर्ष है और चुनाव कार्यकाल खत्म होने से पहले कराए जाने चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के सुरेश महाजन बनाम मध्य प्रदेश राज्य फैसले का हवाला देते हुए खंडपीठ ने कहा कि ट्रिपल टेस्ट पूरा न होने के नाम पर चुनाव नहीं टाले जा सकते।
राज्य सरकार ने 5 सदस्यीय समर्पित आयोग गठित किया
राज्य सरकार ने 18 मई 2026 को पूर्व न्यायमूर्ति राम अवतार सिंह की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समर्पित आयोग गठित किया है। आयोग ने बताया कि उसका 60 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और 40 जिलों में सर्वे हुआ है। हालांकि उसने सर्वे में कम भागीदारी की बात स्वीकार की। आगरा जिले में 25 लाख से अधिक ग्रामीण आबादी के बीच बैठक में केवल 175 लोग आए और 29 ने फार्म भरे; इनमें कई गैर-ओबीसी थे। कई फार्म में सिर्फ टिक या ‘हां-ना’ में जवाब थे।
असंवैधानिक बताने वाली याचिकाएं खारिज
राजनीतिक पिछड़ेपन के मानदंड भी स्पष्ट नहीं थे। खंडपीठ ने कहा कि उपलब्ध सामग्री से सुप्रीम कोर्ट की अपेक्षित अनुभवजन्य जांच पूरी होती नहीं दिखती। उसने स्थानीय निकायवार डेटा रजिस्टर, आबादी और प्रतिनिधित्व की तुलना तथा सामाजिक-आर्थिक संकेतकों को राजनीतिक भागीदारी से जोड़ने का सुझाव दिया। अदालत ने 25 मई 2026 का शासनादेश रद करने की मांग और पंचायत राज अधिनियम की धारा 12(3-ए) तथा 12-बी(3) को असंवैधानिक बताने वाली याचिकाएं खारिज कर दीं।
अदालत ने सरकार को दिया निर्देश
प्रशासक की व्यवस्था अस्थायी होगी और इससे उनका कार्यकाल नहीं बढ़ेगा। गंभीर शिकायत पर सरकार कार्रवाई कर सकती है। राज्य निर्वाचन आयोग ने बताया कि मतदाता सूची 10 जून 2026 को प्रकाशित हो चुकी है। अदालत ने सरकार को चुनाव के लिए कर्मचारी, धन और सुरक्षा उपलब्ध कराने तथा आयोग को रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।
