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अवमानना याचिका वापस लेने के लिए धमकी का मामला: इलाहाबाद हाई कोर्ट सख्त, DGP से मांगा एफिडेविट

By Jagran NewsEdited By: Shiv Govind Mishraa
Published: Wed, 14 Oct 2026 03:18 AM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अवमानना याचिका वापस लेने के लिए पुलिस द्वारा धमकी और दबाव बनाने के आरोपों पर कड़ा ...और पढ़ें

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HighLights

  1. पुलिस पर अवमानना याचिका वापस लेने का दबाव बनाने का आरोप।

  2. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने डीजीपी से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा।

  3. याचिकाकर्ता के घर जाकर धमकी देने का गंभीर मामला।

विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अवमानना याचिका वापस लेने के लिए घर जाकर दबाव बनाने, गाली-गलौज और धमकी देने के आरोपों पर सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की एकलपीठ ने सुखबीर की याचिका पर डीजीपी को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने अथवा अगली तारीख पर पेश होने का आदेश दिया है।

कोर्ट ने मामले को बुधवार 14 अक्टूबर 2026 के लिए फिर सूचीबद्ध किया है। याची की ओर से अधिवक्ता प्रशांत सिंह रिंकू और संतोष कुमार पांडेय ने बहस की। याची ने हलफनामे में आरोप लगाया है कि पुलिसकर्मी रोज उसके घर आकर याचिका वापस लेने का दबाव बना रहे हैं।

उसके अनुसार 18 सितंबर 2026 को दोपहर दो बजे थाना प्रभारी सचिन चौधरी, थाना शमशाबाद फर्रुखाबाद और एसआइ महेंद्र सिंह कई पुलिसकर्मियों के साथ घर आए। अधिवक्ताओं के अनुसार याची और उसके परिवार से पुलिस वालों ने गाली-गलौज की और केस वापस लेने की धमकी दी। याची के तैयार न होने पर वे गाली देकर चले गए।

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पुलिसकर्मी 19 सितंबर से 21 सितंबर तक कई बार आए और वही हरकत की। कोर्ट ने आरोपों को गंभीरता से लेते हुए डीजीपी से हलफनामा मांगा। आदेश पर हस्ताक्षर होने से पहले, लंच के बाद अपर महाधिवक्ता कार्तिकेय सरन ने कहा कि उन्हें मामले में निर्देश मिले हैं, लेकिन वे लंच से पहले तथ्य नहीं रख सके। उन्होंने आदेश का पालन करने के लिए समय मांगा।