31 मार्च 2015 से पहले TET उत्तीर्ण कर चुके शिक्षकों की नियुक्ति सुरक्षित, इलाहाबाद हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 31 मार्च 2015 से पहले टीईटी उत्तीर्ण कर चुके शिक्षकों की नियुक्ति को सुरक्षित करार दिया ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट।
HighLights
कुशीनगर के सहायक अध्यापक की विशेष अपील स्वीकार
हाई कोर्ट ने सहायक अध्यापक बर्खास्तगी को अवैध करार दिया
विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक निर्णय में कहा है कि 31 मार्च 2015 से पहले नियुक्त और इस अवधि में टीईटी पास कर चुके शिक्षकों की नियुक्ति सुरक्षित रहेगी। न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ल की खंडपीठ ने कुशीनगर के सहायक अध्यापक मोहम्मद मुस्तफा सिद्दीकी की विशेष अपील स्वीकार करते हुए यह टिप्पणी की है। कोर्ट ने बर्खास्तगी को अवैध करार दिया है।
बीएसए के आदेश को प्रबंधन ने नहीं माना
अपीलार्थी को मृतक आश्रित नियमावली 1974 के तहत बाल बारी जूनियर हाईस्कूल, कसया में सहायक अध्यापक नियुक्त किया गया था। प्रबंध समिति के 25 दिसंबर 2010 के प्रस्ताव और बीएसए के 30 जुलाई 2011 के अनुमोदन के बाद आठ अगस्त 2011 को नियुक्ति पत्र जारी हुआ। याची ने 10 अगस्त 2011 को कार्यभार ग्रहण किया। उसने 22 फरवरी 2014 को टीईटी भी उत्तीर्ण कर ली, लेकिन प्रबंधन ने अपीलार्थी की सेवा समाप्त कर दी। हालांकि बीएसए ने 28 नवंबर 2014 को बर्खास्तगी अस्वीकृत कर अपीलार्थी को पुनः ज्वाइन कराने का आदेश दिया परंतु प्रबंधन ने बीएसए के आदेश का पालन नहीं किया। इसे हाई कोर्ट में चुनौती दी गई।
एकलपीठ ने रिट खारिज की थी
एकलपीठ ने 23 अप्रैल 2015 को रिट खारिज करते हुए कहा कि नियुक्ति तिथि पर याची टीईटी पास नहीं था, इसलिए नियुक्ति अवैध है, भले ही बाद में टीईटी उत्तीर्ण कर ली गई थी। इसी निर्णय को विशेष निर्णय में चुनौती दी गई। खंडपीठ ने कहा कि एनसीटीई की अधिसूचना (23 अगस्त 2010) के बाद 29 जुलाई 2011 से कक्षा छह से आठ के लिए भी टीईटी अनिवार्य हुआ, लेकिन प्रदेश सरकार ने इसे पांच दिसंबर 2012 के शासनादेश से लागू किया। इसमें स्पष्ट था कि एक अप्रैल 2010 से पांच साल यानी 31 मार्च 2015 तक कार्यरत शिक्षकों को न्यूनतम अर्हता हासिल करने का मौका दिया जाएगा।
कोर्ट ने प्रबंधन की कार्रवाई को दुर्भावनापूर्ण बताया
याची की नियुक्ति के समय 1978 की नियमावली में टीईटी अनिवार्य नहीं थी। याची ने निर्धारित कटआफ 31 मार्च 2015 से पहले ही 2014 में टीईटी उत्तीर्ण कर ली थी, इसलिए उसकी नियुक्ति आरटीई की धारा 23 के प्रथम परंतुक और शासनादेश से सुरक्षित है। कोर्ट ने प्रबंधन की कार्रवाई को दुर्भावनापूर्ण बताते हुए कहा कि वैधानिक प्राधिकारी द्वारा बर्खास्तगी अस्वीकृत होने के बाद भी याची को काम से रोकना मनमानी है। खंडपीठ ने एकलपीठ का आदेश रद करते हुए याची को तत्काल बहाल करने, सेवा निरंतरता और पूरे बकाया वेतन पर छह प्रतिशत साधारण ब्याज के साथ भुगतान का आदेश दिया है।
