इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, गैर-संज्ञेय मामलों में चार्जशीट बनेगी परिवाद; समन आदेश कैंसिल
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है कि गैर-संज्ञेय अपराधों में पुलिस की चार्जशीट को राज्य के मुकदमे के बजाय परिवाद ...और पढ़ें

HighLights
गैर-संज्ञेय अपराधों में पुलिस चार्जशीट परिवाद के रूप में मान्य।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जारी समन आदेश को रद्द किया।
न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव की एकलपीठ ने यह टिप्पणी की।
विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि जब पुलिस विवेचना के बाद किसी मामले में केवल गैर-संज्ञेय अपराध पाए जाते हैं तो पुलिस अधिकारी द्वारा दाखिल चार्जशीट को राज्य के मुकदमे के बजाय परिवाद (कंप्लेंट केस) के रूप में लिया जाना चाहिए।
न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव की एकलपीठ ने यह टिप्पणी विकास सिंह और दो अन्य की ओर से दाखिल याचिका आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए की है। याचीगण के खिलाफ फतेहपुर जिले के मलावा थाने में एफआइआर दर्ज कराई गई थी। इसमें पुलिस चार्जशीट पर संज्ञान लेकर कोर्ट ने समन जारी किया था। इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। पीठ ने समन रद कर दिया है।
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याचीगण के अधिवक्ता मयंक कृष्णा सिंह चंदेल और विनोद कुमार सिंह चंदेल ने दलील दी कि कथित धाराओं के अपराध गैर-संज्ञेय श्रेणी में हैं। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के स्पष्टीकरण के अनुसार ऐसी स्थिति में विवेचना अधिकारी की रिपोर्ट को परिवाद माना जाएगा और संबंधित पुलिस अधिकारी को परिवादी।
राज्य की ओर से पेश अपर शासकीय अधिवक्ता ने याचिका का विरोध तो किया लेकिन इस कानूनी तर्क को चुनौती नहीं दी। अदालत ने पाया कि फतेहपुर की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने 13 अप्रैल 2026 को इस मामले को गलत तरीके से राज्य के मुकदमे के रूप में लेते हुए समन जारी किया था जो विधिक भूल है।
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हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसके इस आदेश से अधीनस्थ अदालत को इस मामले को परिवाद के रूप में आगे बढ़ाने से नहीं रोका जाएगा, यदि कानून के अनुसार ऐसा करना आवश्यक हो।
