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वसीयत की वैधता पर राजस्व अधिकारी नहीं, सिविल कोर्ट करेगा निर्णय; इलाहाबाद HC का महत्वपूर्ण फैसला

By Suresh pandey Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Fri, 02 Oct 2026 07:02 PM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि वसीयत की वैधता का अंतिम फैसला सिविल कोर्ट ही ...और पढ़ें

इलाहाबाद उच्च न्यायालय।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय।

HighLights

  1. कोर्ट ने कमिश्नर झांसी के आदेश पर लगाई रोक 

  2. हाई कोर्ट ने कहा- पक्षकार यथास्थिति बनाए रखें

विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि वसीयत की वैधता और उसके असली होने पर विवाद की स्थिति में अंतिम फैसला सिविल कोर्ट ही करेगा, राजस्व अधिकारी नहीं। नामांतरण सिर्फ खाते की प्रविष्टि है, मालिकाना हक नहीं तय करता।

एकलपीठ ने की सुनवाई

झांसी के अखिलेंद्र प्रताप सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की एकलपीठ ने यह टिप्पणी की है और कमिश्नर के आदेश पर रोक लगाते हुए प्रकरण में विचार की आवश्यकता जताई है। कहा है कि छह सप्ताह बाद मामला सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए। 

झांसी का क्या है मामला, जानें

मामला झांसी के गांव पाली पहाड़ी स्थित जमीन का है। खातेदार चंदन सिंह अविवाहित थे और सात अक्टूबर 2016 को निःसंतान मौत हो गई। याची का दावा है कि वह उनकी मृत बहन शांति देवी के बेटे हैं और चंदन सिंह ने दो अप्रैल 2016 को उनके पक्ष में वसीयत की थी, जो चार अप्रैल को रजिस्टर्ड हुई। दूसरी बहन भगवती देवी ने वारिस बताकर अपना नाम दर्ज करा लिया।

एसडीएम ने वसीयत को संदिग्ध बताया 

तहसीलदार ने दो नवंबर 2022 को याची के पक्ष में दाखिल-खारिज किया, एसडीएम ने 28 दिसंबर 2023 को भगवती की अपील खारिज कर दी। भगवती ने कमिश्नर झांसी के समक्ष पुनर्विचार अर्जी (रिवीजन) दी। कमिश्नर ने 18 अगस्त 2026 को रिवीजन स्वीकार कर तहसीलदार व एसडीएम के आदेशों रद कर दिया और याची का नाम काटकर प्रतिवादी का नाम दर्ज करने के लिए कहा। वसीयत को संदिग्ध बताया। कहा, अस्पताल में अंगूठा लिया गया, रविवार को रजिस्ट्रार गए और भगवती को बाहर करने का कारण नहीं लिखा।

हाई कोर्ट में याची का तर्क

हाई कोर्ट में याची ने कहा, दाखिल-खारिज संक्षिप्त कार्यवाही है। भगवती ने खुद वसीयत को चुनौती दी थी जो 15 जुलाई 2024 को खारिज होने के बाद रि-स्टोर (बहाल) हो गया है। इसलिए वसीयत की वैधता सिविल कोर्ट तय करेगा। याची की ओर से विभिन्न फैसलों का हवाला दिया गया। प्रतिपक्षी ने कहा कि कमिश्नर के आदेश के खिलाफ बोर्ड आफ रेवेन्यू में रिवीजन हो सकती है, इसलिए रिट पोषणीय नहीं है।

कोर्ट ने आपत्ति खारिज कर दी 

कोर्ट ने आपत्ति खारिज कर दी। कहा कि उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 210(1) में बोर्ड और कमिश्नर को अधीनस्थ राजस्व न्यायालय के आदेश पर एक समान रिवीजन अधिकार है, दोनों में पदानुक्रम नहीं है। कमिश्नर का रिवीजन आदेश अधीनस्थ न्यायालय का आदेश नहीं है, इसलिए उसके खिलाफ बोर्ड में दूसरी रिवीजन नहीं होगी। कोर्ट ने 18 अगस्त के आदेश पर रोक लगाते हुए पक्षकारों को यथास्थिति बनाए रखने और कोई बैनामा न करने का निर्देश दिया है।

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