स्पेशल टीईटी से शिक्षामित्रों को बाहर रखना वैध, इलाहाबाद हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय; खारिज की याचिका
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्पेशल टीईटी से शिक्षा मित्रों को बाहर रखने के सरकारी फैसले को वैध ठहराया है। कोर्ट ने 221 शिक्षा मित्रों की याचिकाएं खारिज की।

इलाहाबाद हाई कोर्ट।
HighLights
एकलपीठ ने गुरुवार को वसीम अहमद व 220 अन्य की याचिकाएं खारिज की
हाई कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 14 तथा 16 के उल्लंघन का आरोप नहीं टिकता
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पेशल टीईटी (टीईटी) परीक्षा से शिक्षा मित्रों को बाहर रखने संबंधी सरकार के फैसले को वैध ठहराते हुए 221 शिक्षामित्रों की याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान एकलपीठ ने गुरुवार को वसीम अहमद व 220 अन्य की याचिकाएं खारिज करते हुए कहा कि अनुच्छेद 14 तथा 16 के उल्लंघन का आरोप नहीं टिकता।
तीन सितंबर 2026 को विज्ञापन जारी हुआ
याचियों का कहना था कि वे प्रदेश के विभिन्न जिलों में पिछले लगभग 26 साल से प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ा रहे हैं। राज्य सरकार ने दो सितंबर 2026 को शासनादेश जारी कर उप्र शिक्षा सेवा चयन आयोग प्रयागराज को स्पेशल टीईटी कराने का निर्देश दिया और तीन सितंबर 2026 को विज्ञापन जारी हुआ।
तीन नवंबर से प्रस्तावित है परीक्षा
इसके तहत परीक्षा तीन नवंबर 2026 से प्रस्तावित है। याचियों की शिकायत थी कि शासनादेश में स्थानीय निकाय के शिक्षकों, राज्य सरकार या बेसिक शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त संस्थानों के शिक्षकों, एडेड स्कूलों के शिक्षकों और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (सीडब्लयूएसएन) के लिए संविदा/दैनिक वेतन पर लगे विशेष शिक्षकों को तो स्पेशल टीईटी में शामिल किया गया, लेकिन उन्हें नहीं।
याची पक्ष का तर्क
याची पक्ष ने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने अंजुमन इशात-ए-तालीम ट्रस्ट बनाम महाराष्ट्र मामले में टीईटी अनिवार्य किया और इन-सर्विस शिक्षकों को टीईटी उत्तीर्ण करने के लिए 31 अगस्त 2028 तक का समय दिया है। ऐसे में उन्हें भी मौका मिलना चाहिए। यह वर्गीकरण संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है और भेदभावपूर्ण है।
राज्य सरकार और कमीशन की ओर से कहा गया
राज्य सरकार और कमीशन की ओर से कहा गया कि स्पेशल टीईटी आरटीई एक्ट की धारा 23 और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में केवल इन-सर्विस शिक्षकों के लिए लाया गया है। शिक्षामित्र नियमित शिक्षक नहीं हैं, उनकी स्थिति अलग है। नियमित टीईटी दो, तीन और चार जुलाई 2026 को हुआ था, जिसमें 19,94,661 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था और रिजल्ट 26 अगस्त 2026 को घोषित हुआ। याची उसमें शामिल हो सकते थे, लेकिन वे शामिल नहीं हुए। अब वे स्पेशल टीईटी में बराबरी का दावा नहीं कर सकते।
अनुच्छेद 14 और 16 के उल्लंघन का आरोप नहीं टिकता
कोर्ट ने माना कि दो सितंबर 2026 का सरकारी आदेश आरटीई एक्ट की धारा 23 और सुप्रीम कोर्ट के बाध्यकारी निर्देशों पर आधारित है। इन-सर्विस शिक्षकों और नान-सर्विस व्यक्तियों के बीच वर्गीकरण का स्पष्ट आधार है और इसका उद्देश्य भी वैध है। यह नियुक्ति का अधिकार नहीं देता, बल्कि निर्धारित अवधि में योग्यता पूरी करने में मदद करता है। ऐसे में अनुच्छेद 14 और 16 के उल्लंघन का आरोप नहीं टिकता।
