सिर्फ आपराधिक केस लंबित होने पर सिपाही भर्ती से बाहर नहीं कर सकते, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एसपी मऊ का आदेश रद किया
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि सिर्फ आपराधिक मुकदमा लंबित होने के आधार पर किसी अभ्यर्थी को सिपाही भर्ती ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट की फाइल फोटो।
HighLights
कोर्ट ने सिपाही भर्ती-2023 के चयनित अभ्यर्थी की अभ्यर्थिता निरस्त मामले में की टिप्पणी
हाई कोर्ट ने एसपी मऊ को दो महीने के भीतर नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया
विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि सिर्फ आपराधिक मुकदमा लंबित होने के आधार पर किसी अभ्यर्थी को सिपाही भर्ती से बाहर नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने सिपाही भर्ती-2023 के चयनित अभ्यर्थी की अभ्यर्थिता निरस्त करने संबंधी एसपी मऊ का आदेश रद करते हुए यह टिप्पणी की है। न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम की एकलपीठ ने सूरज कनौजिया की याचिका स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया है।
याची के अधिवक्ता अभय प्रताप सिंह ने बताया कि मुवक्किल लिखित परीक्षा और मेडिकल में सफल होकर सिविल पुलिस में चयनित हुआ था। चरित्र सत्यापन के दौरान पता चला कि कुशीनगर के थाना तुर्कपट्टी में उसके खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 60 के तहत दर्ज मुकदमे में आरोप पत्र दाखिल है। इसी आधार पर जिलाधिकारी कुशीनगर ने उसके चरित्र सत्यापन की संस्तुति नहीं की। इसके बाद एसपी मऊ ने 26 अगस्त 2025 को उसकी अभ्यर्थिता निरस्त कर दी।
कोर्ट ने कहा कि एसपी मऊ ने केवल जिलाधिकारी और एसपी कुशीनगर की रिपोर्ट को आंख बंद कर स्वीकार कर लिया। उन्होंने न तो अपराध की प्रकृति पर विचार किया और न ही 28 अप्रैल 1958 के शासनादेश और सुप्रीम कोर्ट के अवतार सिंह केस के सिद्धांत के अनुसार स्वतंत्र विवेक का प्रयोग किया।
कोर्ट ने पाया कि एफआईआर में कोई स्वतंत्र गवाह नहीं था। एनसीआर केस की कभी विवेचना ही नहीं हुई। 30 मई 2021 की एफआईआर में पांच साल बाद भी ट्रायल पूरा नहीं हुआ और याची को 16 मई 2025 को जमानत मिल चुकी है। याची पर तथ्य छिपाने का भी कोई आरोप नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि उपयुक्तता तय करना नियुक्ति प्राधिकारी का अधिकार है, लेकिन विवेक का मनमाना प्रयोग होने पर दखल जरूरी है। राजस्थान विद्युत निगम, चेतन जेफ और इम्तियाज मल्ला जैसे मामलों में दिए गए फैसले इस केस में लागू नहीं होते। कोर्ट ने 26 अगस्त 2025 का आदेश रद करते हुए एसपी मऊ को दो महीने में नए सिरे से आदेश पारित करने का निर्देश दिया है।
