विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

बार एसोसिएशन में महिला वकीलों को 30% प्रतिनिधित्व करें अनिवार्य: इलाहाबाद HC का चुनाव रद करने से इन्कार

By Suresh pandey Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Sat, 12 Sep 2026 07:23 PM (IST)

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सिविल बार एसोसिएशन बुलंदशहर का चुनाव रद करने से इनकार कर दिया है। बार एसोसिएशन को एक ...और पढ़ें

इलाहाबाद उच्च न्यायालय।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय।

HighLights

  1. सिविल बार एसोसिएशन बुलंदशहर का चुनाव बरकरार, जनहित याचिका निस्तारित

  2. बार एसोसिएशन को एक माह में अपने बॉयलाज में संशोधन करने का दिया निर्देश

विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सिविल बार एसोसिएशन बुलंदशहर का चुनाव रद करने से इन्कार कर दिया है। कोर्ट ने बार एसोसिएशन को एक महीने के भीतर अपने बायलाज में संशोधन कर भविष्य के सभी चुनावों में महिला वकीलों के लिए 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व अनिवार्य करने का निर्देश दिया है।

महिला अधिवक्ता की जनहित याचिका निस्तारित

यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली एवं न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने बुलंदशहर की महिला अधिवक्ता भावना पंडित की जनहित याचिका निस्तारित करते हुए दिया है। याचिका में 16 अप्रैल को संपन्न हुए बार एसोसिएशन के चुनाव को चुनौती दी गई थी।

याची का क्या तर्क था? 

याची का तर्क था कि दीक्षा एन. अमृतेश बनाम कर्नाटक राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत बार एसोसिएशन की कार्यकारिणी में कम से कम 30 प्रतिशत महिला आरक्षण अनिवार्य है। बुलंदशहर बार में 79 महिला मतदाता होने के बावजूद चुनाव में कोई भी महिला पदाधिकारी नहीं चुनी गई। इसलिए चुनाव रद कर नए सिरे से 30 प्रतिशत आरक्षण के साथ चुनाव कराने की मांग की गई थी।

बार एसोसिएशन की दलील 

बार एसोसिएशन की ओर से दलील दी गई कि चुनाव प्रक्रिया गत चार अप्रैल को अधिसूचित हुई थी। किसी भी महिला अधिवक्ता ने नामांकन नहीं भरा था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हुए 20 अप्रैल को नवनिर्वाचित कार्यकारिणी ने चार महिला वकीलों निशा सिंह, अंजलि, रचना सोलंकी व शबाना मलिक को सह-कोषाध्यक्ष व कार्यकारिणी सदस्य मनोनीत कर 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व का मानक पूरा कर दिया था।

'पूरे चुनाव को रद करना न्यायहित में नहीं'

हाई कोर्ट ने माना कि तकनीकी रूप से मनोनयन की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के संशोधित आदेश के अनुरूप प्रशासनिक न्यायाधीश की सहमति से नहीं हुई थी लेकिन किसी महिला वकील ने चुनाव नहीं लड़ा था और बाद में चार महिलाओं को शामिल कर लिया गया इसलिए पूरे चुनाव को रद करना न्यायहित में नहीं होगा।

अदालत ने दिया आदेश 

अदालत ने कहा कि बॉयलाज संशोधन में हालिया चुनाव और मनोनयन को विशेष भूतलक्षी प्रभाव भी दिया जा सकता है। बार एसोसिएशन एक महीने के भीतर चुनाव प्रक्रिया और चारों महिला वकीलों के मनोनयन की पूरी जानकारी जिला जज, वरिष्ठतम महिला वकील व पदाधिकारियों के परामर्श के साथ बुलंदशहर के प्रशासनिक न्यायाधीश को भेजेगी और जब तक प्रशासनिक न्यायाधीश द्वारा कोई प्रतिकूल आदेश नहीं दिया जाता तब तक गत 16 अप्रैल को निर्वाचित और 20 अप्रैल को मनोनीत सदस्यों वाली कार्यकारिणी यथावत कार्य करती रहेगी।

यह भी पढ़ें- 31 मार्च 2015 से पहले TET उत्तीर्ण कर चुके शिक्षकों की नियुक्ति सुरक्षित, इलाहाबाद हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला

यह भी पढ़ें- धर्म बदलकर मुस्लिम बने युवक को कोर्ट में पेश करने का निर्देश, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिता को भेजा नोटिस