रजिस्ट्रेशन से नहीं चलेगा बड़ा स्लॉटर हाउस, FSSAI लाइसेंस जरूरी; इलाहाबाद हाई कोर्ट का आदेश
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि बड़े बूचड़खानों के लिए केवल पंजीकरण नहीं, बल्कि एफएसएसएआई का नियमित लाइसेंस ...और पढ़ें

इलाहाबाद उच्च न्यायालय।
HighLights
हाई कोर्ट में कानपुर के कारोबारी की याचिका खारिज
कोर्ट ने कहा- कमियां दूर कर लाइसेंस के लिए आवेदन लें
विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने साफ कहा है कि बड़े स्लॉटर हाउस को चलाने के लिए सिर्फ रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट काफी नहीं है, उसके लिए फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथारिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआइ) का नियमित लाइसेंस लेना जरूरी है।
कानपुर के डीएम के आदेश को दी थी चुनौती
न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की बेंच ने कानपुर के जुनैद आलम की याचिका खारिज करते हुए यह आदेश दिया है। जुनैद ने कानपुर के जिलाधिकारी के 22 मई 2025 के आदेश को चुनौती दी थी। जिलाधिकारी ने दो यूनिट वाला स्लाटर हाउस फिर से खोलने का याची का आवेदन खारिज कर दिया था।
याची के पास फूड सेफ्टी का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट है
याची का कहना था कि उसके पास फूड सेफ्टी का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट है जो 2028 तक वैध है। साथ ही जीएसटी उद्यम रजिस्ट्रेशन और नगर निगम का अनापत्ति प्रमाण-पत्र भी है। उसे बिना सुनवाई और बिना आधुनिकीकरण का समय दिए बंद कर दिया गया।
सरकार की ओर से दिया गया तर्क
सरकार की तरफ से कहा गया कि 16 मई 2025 को याची को सुनवाई दी गई थी। उसके पास लाइसेंस नहीं, सिर्फ रजिस्ट्रेशन है। याची ने खुद स्टेट लाइसेंस के लिए आवेदन किया था जिसमें 20 बड़े जानवर काटने की क्षमता दिखाई थी। वह आवेदन कमियां होने के कारण 27 अप्रैल 2025 को वापस कर दिया गया था।
कोर्ट ने कहा कि लाइसेंस लेना ही होगा
पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि कानून के अनुसार दो बड़े जानवर, 10 छोटे जानवर या 50 मुर्गा प्रतिदिन तक काटने पर ही रजिस्ट्रेशन चलता है। 20 बड़े जानवरों की क्षमता वाला स्लाटर हाउस छोटे कारोबार में नहीं आएगा। उसे लाइसेंस लेना ही होगा। व्यापार का अधिकार होने का मतलब यह नहीं कि बिना लाइसेंस के स्लाटर हाउस चलाया जाए। सुप्रीम कोर्ट भी कह चुका है कि बिना लाइसेंस और नियमों का पालन किए स्लाटर हाउस नहीं चल सकते।
