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'हर अपमान या धमकी SC-ST एक्ट का अपराध नहीं', इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आरोपित को दी राहत

By Jagran NewsEdited By: Shiv Govind Mishraa
Published: Sat, 31 Oct 2026 05:37 AM (IST)Updated: Sat, 31 Oct 2026 06:04 AM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने फिरोजाबाद के भूरी सिंह को एससी-एसटी एक्ट के आरोप से बरी कर दिया है, यह कहते ...और पढ़ें

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HighLights

  1. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।

  2. कहा, हर अपमान एससी-एसटी एक्ट का अपराध नहीं होता।

  3. फिरोजाबाद के भूरी सिंह को एक्ट के आरोप से बरी किया।

विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने फिरोजाबाद के भूरी सिंह को एससी-एसटी एक्ट के अपराध से उन्मुक्त कर दिया है और कहा है कि मारपीट में केस चलेगा। न्यायमूर्ति संतोष राय की एकलपीठ ने यह आदेश देते हुए कहा कि हर अपमान या धमकी एससी-एसटी एक्ट का अपराध नहीं होती, यह तभी बनता है जब अपमान पीड़ित के अनुसूचित जाति/जनजाति से होने के कारण किया गया हो।

कोर्ट ने कहा अभियोजन सामग्री में जातिसूचक अपशब्द का कोई विशिष्ट आरोप नहीं मिला, ऐसे में कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।थाना टूंडला (जिला फिरोजाबाद) में केस दर्ज हुआ था। आरोप था कि भूरी सिंह ने घायल प्रशांत कुमार पर हमला किया और शिकायतकर्ता को जातिसूचक अपशब्द कहे। विशेष न्यायाधीश फिरोजाबाद ने आरोप पत्र पर इस वर्ष पांच फरवरी को समन आदेश जारी किया था।

अपीलकर्ता का कोई आपराधिक इतिहास नहीं

इसे रद कराने के लिए हाई कोर्ट में अपील की गई थी। याची के अधिवक्ता ने कहा कि पुरानी रंजिश के कारण झूठा फंसाया गया है। शुरुआती बयानों व एफआइआर में जातिसूचक अपशब्द का जिक्र नहीं था, जो मजिस्ट्रेट के सामने दिए बयान में बाद में जोड़ा गया। कुछ ग्रामीणों ने घटना से इन्कार करते हुए शपथ-पत्र दिए हैं, कोई स्वतंत्र गवाह नहीं है और अपीलकर्ता का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है।

सरकारी वकील ने कहा कि एफआइआर में विशिष्ट आरोप हैं और झूठे फंसाने या बयानों में सुधार जैसे सवाल तथ्यों के विवादित प्रश्न हैं, जिन्हें धारा 528 बीएनएसएस की कार्यवाही में तय नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा बयानों से साबित होता है कि आरोपित ने प्रशांत कुमार के बाएं कान पर किसी कठोर भोथरी वस्तु से वार किया।

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विवाद की वजह यह बताई गई कि प्रशांत ने आरोपित के कुत्ते की ओर पत्थर फेंका था लेकिन किसी बयान में ऐसे जातिसूचक अपशब्द नहीं हैं, जिनसे पीड़िता को अनुसूचित जाति का होने के कारण अपमानित करने की मंशा झलके। घटना ‘सार्वजनिक दृष्टि’ में हुई, इसका भी कोई साक्ष्य नहीं है, जो इन धाराओं के लिए अनिवार्य शर्त है। मेडिकल रिपोर्ट में कान के पीछे साधारण कटा घाव पाया गया।

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