यमुना एक्सप्रेसवे बस अग्निकांड पर इलाहाबाद HC हाई कोर्ट सख्त, केंद्र सरकार को भी बनाया पक्षकार
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यमुना एक्सप्रेसवे बस अग्निकांड मामले में केंद्र सरकार को भी पक्षकार बनाया है। कोर्ट ने ऑटोमोटिव ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट।
HighLights
अपर मुख्य सचिव के हलफनामे में कहा- सितंबर तक 7665 बसों का चालान, इनमें 1008 जब्त
एसी स्लीपर बस में नौ यात्रियों की जल कर हो गई थी मौत मामले में जनहित याचिका की सुनवाई
विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। यमुना एक्सप्रेसवे पर एसी स्लीपर बस में नौ यात्रियों की जल कर मौत मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार को भी पक्षकार बना लिया है। कोर्ट ने आटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड का उल्लेख करते हुए कहा है कि उसे यह जानकारी नहीं दी गई कि हादसे वाली बस ने इन मानकों का पालन किया था अथवा नहीं। यदि पालन नहीं हुआ तो चालक-परिचालक ही नहीं, लाइसेंसी के खिलाफ भी कार्रवाई हो और उसके बसों के संचालन पर रोक पर विचार किया जाए।
अगली सुनवाई 17 नवंबर को
दैनिक जागरण सहित अन्य अखबारों में छपी खबर के आधर पर स्वत कायम जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकलपीठ ने यह आदेश दिया है। मामले में अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी।
हादसे में नौ यात्रियों की हुई थी मौत
यमुना एक्सप्रेसवे पर सितंबर 2026 के आखिरी सप्ताह में स्लीपर बस में आग लगने से नौ यात्रियों की जल कर मौत हो गई थी। कोर्ट ने 25 सितंबर 2026 को पारित विस्तृत आदेश में हादसे पर चिंता जताई थी कि एसी स्लीपर बसें बिना उचित जांच और बिना अग्निशमन यंत्र जैसे सुरक्षा उपायों के चल रही हैं। चालक-परिचालकों को भी हादसे के समय जिम्मेदारी से काम करने का प्रशिक्षण नहीं है।
कोर्ट ने इन अधिकारियों को किया था तलब
कोर्ट ने मुख्य सचिव, डीजीपी और अपर मुख्य सचिव परिवहन को वीडियो कांफ्रेंसिंग से तलब किया था। अधिकारियों ने बताया था कि आपराधिक कार्रवाई शुरू की गई है, लेकिन कोर्ट ने माना कि नियमित जांच में और सुधार की जरूरत है।
इन्होंने व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल किया है
मामले में अपर मुख्य सचिव परिवहन और डीजीपी ने व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल किया है। इसके अनुसार प्रदेश में स्लीपर बसों के आल इंडिया टूरिस्ट परमिट 2023 में 252, 2024 में 340, 2025 में 610 और सितंबर 2026 तक 1,104 जारी हुए। इस साल अप्रैल से सितंबर तक छह विशेष अभियानों में 7,665 बसों का चालान कर 1,008 बसें जब्त की गईं।
कोर्ट ने नोटिस जारी करने का दिया आदेश
हलफनामा के अनुसार प्रदेश की सीमा पर स्थायी चेक पोस्ट नहीं हैं, औचक जांच होती है। आटोमैटिक टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के अधीन हैं, प्रदेश के नियंत्रण में नहीं हैं। अपर महाधिवक्ता संजीव सिंह ने मंत्रालय को पक्षकार बनाने की मांग की। इस पर कोर्ट ने सड़क परिवहन मंत्रालय के सचिव को नोटिस जारी करने और फाइल की कापी एडिशनल सालिसिटर जनरल को देने का आदेश दिया।
