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विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए हत्या मामले में दोषी की सजा निलंबित, इलाहाबाद HC में जमानत मंजूर

By Suresh pandey Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Mon, 19 Oct 2026 07:57 PM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हत्या के दोषी नंदलाल राय की आजीवन कारावास की सजा निलंबित कर जमानत दी, ताकि वह ...और पढ़ें

इलाहाबाद उच्च न्यायालय।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय।

HighLights

  1. सजा सुनाए जाने से पहले भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता होने का कोर्ट में किया दावा

  2. वाराणसी की अदालत ने अप्रैल 2025 में दोषी नंदलाल राय को सजा सुनाई थी

विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हत्या मामले में दोषी नंदलाल राय उर्फ बबलू राय की आजीवन कारावास की सजा निलंबित करते हुए उसे जमानत दे दी है। वाराणसी की अदालत ने अप्रैल 2025 में उसे सजा सुनाई थी। राय ने सजा के खिलाफ अपील दाखिल की है।

चुनाव लड़ने का अवसर छिन सकता है

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न जन प्रतिनिधियों की दोषसिद्धि पर रोक लगाते हुए माना है कि राजनेताओं का अपने मतदाताओं के प्रति विशेष दायित्व होता है। दोषसिद्धि पर रोक न मिलने से चुनाव लड़ने का अवसर छिन सकता है।

राय के वकील ने क्या दी दलील?

राय के वकील ने दलील दी कि अभियोजन का मामला काफी हद तक परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है। उन्होंने जांच के दौरान राय के नाम का देर से सामने आना, प्रत्यक्षदर्शी की गवाही पर संदेह और हत्या के हथियार की बरामदगी पर सवाल उठाए। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, राय राम जन्मभूमि आंदोलन के सक्रिय सदस्य प्रमोद कुमार निगम की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए लोगों में शामिल है। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि राय का संबंध मुख्तार अंसारी से भी था।

खंडपीठ का निर्णय

राय के वकील ने अदालत को बताया कि वह सजा सुनाए जाने से पहले भाजपा का सक्रिय कार्यकर्ता था और 2027 के विधानसभा चुनाव में स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में अथवा संभव हुआ तो भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहता है। खंडपीठ ने कहा कि आम व्यक्ति के आजीविका के अधिकार को ध्यान में रखते हुए, जो किसी राजनेता के चुनाव लड़ने के अधिकार से कम महत्वपूर्ण नहीं है, अपील के अंतिम निर्णय तक राय की दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगाई जानी चाहिए।

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