यूपी पुलिस SI भर्ती 2025 मामले में इलाहाबाद HC का बड़ा फैसला, उत्तरकुंजी को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यूपी पुलिस SI भर्ती 2025 की अंतिम उत्तरकुंजी को चुनौती देने वाली 22 याचिकाएं खारिज की। ...और पढ़ें

इलाहाबाद हाई कोर्ट।
HighLights
हाई कोर्ट ने श्याम सुंदर और दो अन्य सहित कुल 22 याचिकाओं पर एक साथ फैसला सुनाया
उप्र पुलिस में सब-इंस्पेक्टर (सिविल पुलिस) और समकक्ष पदों की सीधी भर्ती-2025 मामला
विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस में सब-इंस्पेक्टर (सिविल पुलिस) और समकक्ष पदों की सीधी भर्ती-2025 की लिखित परीक्षा की अंतिम उत्तरकुंजी को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति अनीश कुमारगुप्ता ने श्याम सुंदर व दो अन्य सहित कुल 22 याचिकाओं पर एक साथ फैसला सुनाया।
4,543 पदों के लिए परीक्षा हुई थी
भर्ती बोर्ड ने 12 अगस्त 2025 के विज्ञापन के तहत 4,543 पदों के लिए परीक्षा आयोजित की थी। लिखित परीक्षा 14 और 15 मार्च 2026 को हुई थी। 23 मार्च को प्रोविजनल उत्तरकुंजी जारी करके अभ्यर्थियों से आपत्तियां मांगी गई। बोर्ड ने 32 प्रश्नों को जांच के लिए चुना और विषय विशेषज्ञों से संदर्भ-स्रोतों सहित राय ली।
14 जुलाई को अंतिम परिणाम घोषित हुआ
इसके बाद सात मई को अंतिम उत्तरकुंजी और परीक्षा परिणाम जारी हुआ। इसमें करीब 12,333 अभ्यर्थी सफल हुए। दस्तावेज सत्यापन, शारीरिक मानक परीक्षा और शारीरिक दक्षता परीक्षा के बाद 14 जुलाई को अंतिम परिणाम घोषित किया गया। याचिकाकर्ता इसमें सफल नहीं हुए।
याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता का तर्क
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक खरे और प्रभाकर अवस्थी संजय यादव सहित कई अधिवक्ताओं ने पक्ष रखा। याची अधिवक्ताओं ने कहा, कुछ प्रश्नों के सही उत्तर पर हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच पहले अन्य भर्तियों में अंतिम निर्णय दे चुकी है। ऐसे में वही उत्तर सही माना जाएं, जिन अभ्यर्थियों के उत्तर प्रोविजनल उत्तरकुंजी में सही थे, उन्हें आपत्ति का मौका नहीं मिला। अंतिम उत्तरकुंजी में बोर्ड ने कुछ उत्तर बदल दिया, लेकिन उसके बाद आपत्ति का अवसर नहीं दिया।
अदालत ने क्या कहा?
अदालत ने कहा, डिवीजन बेंच के पूर्व फैसले भी उसी कोर्ट द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति की राय पर आधारित थे। अदालत ने यह भी दर्ज किया कि बोर्ड के जवाबी हलफनामे का जवाब दाखिल करने का अवसर देने पर सभी याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कहा कि वे रिजाॅइंडर दाखिल नहीं करना चाहते। कोर्ट के सीधे सवाल पर भी कोई वकील बोर्ड पर दुर्भावना (मालाफाइड), पक्षपात या अनुचित साधन अपनाने का आरोप नहीं लगा सका।
कोर्ट ने प्रक्रिया में कोई अवैधता नहीं पाई
कोर्ट ने कहा कि किसी भी प्रश्न पर विशेषज्ञों की राय अलग-अलग हो सकती है। कोई भी राय अंतिम नहीं कही जा सकती। ऐसे में परीक्षा आयोजित करने वाला बोर्ड ही सभी विशेषज्ञ राय पर विचार कर उत्तर की शुद्धता तय करेगा, जो इस मामले में किया गया। इसलिए अदालत ने किसी विशेष प्रश्न के उत्तर की सत्यता में गए बिना ही प्रक्रिया में कोई अवैधता नहीं पाई। सुनवाई में राज्य की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल, स्थायी अधिवक्ता रामस्वरूप उमराव और ब्रीफ होल्डर आकांक्षा मिश्रा उपस्थित रहे।
