विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

ऋण भुगतान के बाद मकान के दस्तावेज जब्त नहीं रख सकता बैंक : हाई कोर्ट

Published: Fri, 29 May 2026 08:59 AM (IST)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बैंक ऑफ इंडिया को एक महिला के बंधक मकान के दस्तावेज दो सप्ताह के भीतर लौटाने ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने बैंक को दस्तावेज लौटाने का आदेश दिया।

  2. महिला को बेटी की शादी के लिए ऋण की आवश्यकता थी।

  3. बैंक ने ऋण भुगतान के बाद भी दस्तावेज रोके थे।

विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बेटी की शादी के लिए संसाधन जोड़ रही मां के हक में फैसला सुनाते हुए उसे दो सप्ताह के अंदर बैंक आफ इंडिया के पास बंधक मकान के बैनामा व अन्य दस्तावेज सौंपने का आदेश दिया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ल की खंडपीठ ने दिया है। याची सीमा जैन का पक्ष अधिवक्ता रजत ऐरन एवं राज कुमार सिंह ने रखा। बताया कि याची ने वर्ष 2002 में गाजियाबाद में मकान खरीदकर नगर निगम में नामांतरण करवा लिया था।

वर्ष 2012 में बैंक आफ इंडिया ने नोटिस भेजकर बताया कि मकान की पूर्व मालकिन अपने बेटे के पांच लाख रुपये के ऋण में गारंटर थी और मकान बंधक था। पूर्व मालकिन के बेटे ने लंबे समय से ऋण नहीं चुकाया, जिससे अब देनदारी 22 लाख रुपये से ऊपर है और इसे न चुकाने की स्थिति में बैंक मकान का कब्जा लेगा।

तत्कालीन बैंक मैनेजर की ओर से यह भी माना गया कि न तो अब गारंटर ही जीवित है और न उसके बेटे की कोई जानकारी है। बैंक ने याची के साथ समझौता किया। इसके तहत 5.50 लाख रुपये जमा करवाकर अदेयता प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया गया लेकिन गिरवी मूल दस्तावेज देने से ये कहकर इन्कार कर दिया गया कि मूल उधारकर्ता अथवा गारंटर को ही कागज लौटाए जा सकते हैं।

याची के अधिवक्ताओं ने बैंक का आचरण मनमाना और अन्यायपूर्ण बताया। बैंक के अधिवक्ता ने दलील दी कि याची न बैंक की ग्राहक है और न ही उधारकर्ता।कोर्ट ने कहा, याची की संपत्ति खरीद और नामांतरण पर बैंक ने कोई आपत्ति कभी नहीं की और न ही उक्त संपत्ति पर कोई सिविल अथवा अपराधिक मामला लंबित है।

यह भी पढ़ें- यूपी में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, प्रयागराज, कानपुर और वाराणसी समेत कई जिलों के अधिकारी बदले

बैंक मानता है कि मूल गारंटर और उसके बेटे से संपर्क अब संभव नहीं है एवं समस्त ऋण राशि समझौते के आधार पर चुका दी गई है। इसलिए अब बैंक के पास उक्त संपत्ति के गिरवी दस्तावेजों को रखने का कोई अधिकार नहीं है।

याची अपनी बेटी की शादी के लिए दस्तावेज के अभाव में ऋण भी नहीं ले पा रही है। कोर्ट ने बैंक को भवन के दस्तावेज अदेयता प्रमाणपत्र के आधार पर रिलीज करने का निर्देश दिया है।