अकासा एयर की मुंबई फ्लाइट ऐन वक्त पर तकनीकी खराबी के चलते हुई कैंसिल, प्रयागराज एयरपोर्ट पर यात्रियों ने किया हंगामा
प्रयागराज एयरपोर्ट पर अकासा एयरलाइंस की मुंबई उड़ान तकनीकी खराबी के कारण रद हो गई। 160 यात्री विमान में सवार हो चुके थे, जिससे अफरा-तफरी मच गई।
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एआई जेनेरेटेड तस्वीर

समय कम है?
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जागरण संवाददाता, प्रयागराज। प्रयागराज एयरपोर्ट पर शुक्रवार को उस समय अफरा-तफरी और हंगामे की स्थिति उत्पन्न हो गई जब तकनीकी खराबी के चलते अकासा एयरलाइंस की मुंबई जाने वाली उड़ान को ऐन वक्त पर रद करना पड़ा। यह विमान दोपहर सवा तीन बजे मुंबई से लैंड हुआ था और इसे वापस शाम चार बजकर चार मिनट पर यात्रियों को लेकर प्रस्थान करना था।
विमान में सवार होने के लिए कुल 160 यात्री पूरी तरह तैयार थे और बोर्डिंग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी अपनी सीटों पर बैठ भी चुके थे। उड़ान भरने से कुछ ही मिनटों पहले विमान के तकनीकी तंत्र में आई खराबी की जानकारी पायलट को हुई जिसके बाद यात्रियों को विमान के भीतर ही इंतजार करने को कहा गया।
एयरलाइंस के इंजीनियरों ने लगभग एक घंटे तक खराबी को दूर करने का प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिली। अंततः सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए प्रबंधन ने उड़ान रद करने की घोषणा कर दी जिससे यात्री आक्रोशित हो उठे। विमान से उतारे जाने के बाद यात्रियों ने एयरपोर्ट परिसर में एयरलाइंस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और वैकल्पिक व्यवस्था न होने पर विरोध दर्ज कराया।
यात्रियों का आरोप था कि उन्हें घंटों तक बिना किसी स्पष्ट जानकारी के विमान और लाउंज में बिठाए रखा गया। स्थिति को बिगड़ता देख एयरलाइंस ने यात्रियों को शनिवार सुबह दूसरी उड़ान से भेजने का आश्वासन दिया।
इस बीच एयरपोर्ट के बाहर यात्रियों को परिवहन संबंधी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। यात्रियों ने शिकायत की कि शहर जाने के लिए उपलब्ध ऑनलाइन कैब सेवाओं निजी टैक्सी चालकों ने मजबूरी का फायदा उठाते हुए सामान्य से कहीं अधिक मनमाना किराया वसूलना शुरू कर दिया।
एयरलाइंस ने बाद में फंसे हुए यात्रियों के लिए सिविल लाइंस स्थित विभिन्न होटलों में ठहरने और भोजन का प्रबंध किया। वहीं कुछ यात्रियों ने अपनी यात्रा रद कर टिकट का रिफंड मांगा तो कई अन्य यात्रियों ने सड़क मार्ग से वाराणसी जाकर वहां से मुंबई की उड़ान लेने का विकल्प चुना।
एयरपोर्ट अधिकारी ने स्पष्ट किया कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है और तकनीकी खामी के कारण ही यह कठिन निर्णय लेना पड़ा।
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