टेंशन नहीं लेने का, सब वक्त करेगा... बॉलीवुड अभिनेता सुदेश बेरी ने प्रयागराज में कलाकारों को दी सलाह
अभिनेता सुदेश बेरी ने प्रयागराज में कलाकारों को 'टेंशन नहीं लेने का, सब वक्त करेगा' की सलाह दी। उन्होंने कला ...और पढ़ें

बॉलीवुड अभिनेता सुदेश बेरी सोमवार को प्रयागराज में हैं।
HighLights
बार्डर फिल्म के 'मथुरा दास' ने कला में स्तर की गिरावट पर जताई चिंता
सनातन का मान बढ़ाते हुए कहा कि विश्व को इसी से मिला जीने का सिस्टम
पथरचट्टी रामलीला कमेटी की रामलीला में मेघनाद की भूमिका में हैं सुरेश बेरी
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। बहुचर्चित फिल्म बार्डर के 'मथुरा दास' यानी अभिनेता सुदेश बेरी मानते हैं कि कला प्रदर्शित करने में जो भाव होने चाहिए उसका स्तर गिरा है। कहते हैं कि मानसिकता में बदलाव आया है और यही बड़ी समस्या है। श्री पथरचट्टी रामलीला कमेटी की रामलीला में मेघनाद की भूमिका निभाने सुरेश बेरी प्रयागराज पहुंचे।
कला में सफलता के प्रश्न पर बोले...
अभिनय और कला में सफलता के प्रश्न पर सभी कलाकारों के लिए कहा कि स्पष्ट रूप से कहा कि ''टेंशन नहीं लेने का, सब वक्त करेगा''। सोमवार को दैनिक जागरण से हुई विशेष मुलाकात में सुदेश बेरी ने कहा कि सनातन ने विश्व को जीने का सिस्टम सिखाया है। संस्कार, त्याग और समर्पण कहीं है तो वह सनातन में ही है।
चार-पांच अमिताभ बच्चन और होने चाहिए
सिविल लाइंस स्थित एक होटल में सुदेश बेरी ने अमिताभ बच्चन को याद किया। कहा कि 140 करोड़ जनसंख्या वाले देश भारत में चार-पांच अमिताभ बच्चन और होने चाहिए। उनका आशय कला में पारंगत होने और उसे ऊंचाइयां देने को लेकर था। अमिताभ बच्चन की जन्मस्थली, विश्व प्रसिद्ध संगम और महर्षि भरद्वाज की तपोभूमि प्रयागराज में आने पर सुखद बताया, कहा कि कुछ वर्षों पहले ड्रामा रामभवन की शूटिंग के लिए यहां आना हुआ था।
प्रयागराज से जुड़ी यादें की साझा
नैनी में फूलमंडी की यादें बताईं। मंच हो या फिल्मों के सीन, इसमें अभिनय के लिए अभ्यास के संबंध में कहा कि सबकुछ निर्देशक की ओर से उपलब्ध कराई गई कहानी और संवाद पर निर्भर होता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ में पूर्ण आस्था जताते हुए कहा कि इन्हें गलत ठहराने वालों को अपने आप पर विचार करना चाहिए।
प्रयागराज और संगम को अद्भुत बताया
फिल्मों की कहानियां, किरदार और करोड़ों लोगों के मस्तिष्क पर छा जाने वाली कला के संबंध में बताया कि बहुत अंतर आया है। पहले जैसे कलाकार वर्तमान में होना बड़ा कठिन है। सुदेश बेरी ने कहा कि रामलीला और फिल्मों में काम करना जैसे रेत पर चलना और पक्की जमीन पर चलने जैसा है। प्रयागराज और संगम को उन्होंने अद्भुत बताया।
