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अनुप्रिया पटेल के सामने मंत्री आशीष का तंज- 'सामान किसी का, क्रेडिट किसी का... यही तो नेतागिरी है

Published: Sun, 18 Oct 2026 11:22 AM (IST)

प्रतापगढ़ में डॉ. सोनेलाल पटेल के परिनिर्वाण दिवस पर अपना दल के आंतरिक राजनीतिक दांव-पेच और कुर्सी के मोह पर ...और पढ़ें

केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल। जागरण

 केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल। जागरण

HighLights

  1. आशीष पटेल ने अपना दल की अंदरूनी राजनीति पर हास्यपूर्ण टिप्पणी की।

  2. राजू सेठ की प्रतिमा का श्रेय विधायक की पत्नी ने लिया।

  3. कुर्सी के मोह पर आशीष पटेल ने विधायक को घेरा।

गुरुदीप त्रिपाठी, प्रतापगढ़। डाॅ. सोनेलाल पटेल के परिनिर्वाण दिवस पर जीआइसी मैदान में मंच पर विचारधारा कम, नेतागिरी के असली फार्मूले ज्यादा चले। केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल मंच पर अतिथि थीं, लेकिन महफिल लूटी कैबिनेट मंत्री आशीष पटेल ने। मौका था स्वागत-सम्मान का। सबसे पहले विश्वनाथगंज विधायक जीतलाल पटेल की पत्नी मिथलेश पटेल अपनी फौज के साथ मंच पर आईं और पूरी अदब के साथ केंद्रीय मंत्री को डा. सोनेलाल पटेल की प्रतिमा भेंट की। तालियां बजीं, फोटो खिंचे।

इसके ठीक बाद मानधाता नगर पंचायत अध्यक्ष इंद्रकली पटेल के बेटे आकाश पटेल उर्फ बादल आए। हाथ में गौतम बुद्ध की प्रतिमा। फिर अपना दल के नेता प्रज्ञा सिंह भी उसी अंदाज में बुद्ध की प्रतिमा लेकर हाजिर। देखते ही देखते मंच पर बुद्ध और सोनेलाल की प्रतिमाओं की प्रदर्शनी लग गई। तभी संचालक से रहा नहीं गया। उन्होंने माइक पर ही भेद खोल दिया- 'विधायक जी की पत्नी ने जो प्रतिमा भेंट की है, उसे बनवाया है हमारे रानीगंज विधानसभा अध्यक्ष राजू सेठ ने।' बस, इतना सुनना था कि आशीष पटेल ने माइक थामा।

विधायक जीतलाल की ओर देखा और हंसते हुए पंच मार दिया- 'विधायक जी, असल नेता तो आप ही हैं। दूसरे का सामान उठाकर दे देना ही तो नेतागिरी है।' पंडाल में सन्नाटा नहीं, ठहाका गूंजा। विधायक खुद हंसी नहीं रोक पाए। सबसे ज्यादा चर्चा में आए राजू सेठ। जिनकी प्रतिमा तो मंच पर पहुंच गई, लेकिन क्रेडिट विधायक की पत्नी ले गईं। मंच से ही सेठ ''लुट'' गए।

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कुर्सी का मोह और बादल की दूरी
किस्सा यहीं खत्म नहीं हुआ। आयोजन की तारीफ करते-करते आशीष की नजर नीचे खड़े बादल पर पड़ी। बोले - 'बादल, नीचे क्यों खड़े हो, मंच पर आओ। लड़ाई तो कुर्सी की है और आप कुर्सी से भाग रहे हैं। जरा जीतलाल जी को देखो, जब से कार्यक्रम शुरू हुआ है कुर्सी ही नहीं छोड़ रहे। उन्हें पता है कुर्सी छिन सकती है।' फिर वही ठहाके, वही तालियां। भारी-भरकम भाषणों के बीच मंत्री ने दो लाइनों में अपना दल की पूरी राजनीति समझा दी- क्रेडिट कैसे लेना है और कुर्सी कैसे बचानी है।

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