2 एसडीएम तो सिर्फ मोहरे! मतदाता सूची में 10,470 वोटरों के नाम बिगाड़ने का असली मास्टरमाइंड कौन?
पीलीभीत में 10,470 वोटरों के नाम बिगाड़ने के मामले में एक सप्ताह बाद भी जांच आगे नहीं बढ़ी है। सपा ...और पढ़ें

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HighLights
10,470 वोटरों के नाम बदलकर मतदान से वंचित रखने का हुआ था प्रयास
एक सप्ताह बीता, षड्यंत्रकारी तक नहीं पहुंची प्रशासन व पुलिस की जांच टीम
जागरण संवाददाता, पीलीभीत। शहर विधानसभा क्षेत्र के 10,470 वोटरों के नाम बिगाड़ने के पीछे कौन था? एक सप्ताह बीतने के बाद भी प्रशासन व पुलिस की जांच टीम इसका जवाब नहीं तलाश सकी...या तलाशने का प्रयास नहीं किया। इसमें दो एसडीएम समेत तीन पर प्राथमिकी हुई, मगर प्रकरण सिर्फ उन तक सीमित नहीं है।
सपा व कांग्रेस आरोप लगा चुकी कि फर्जीवाड़ा के पीछे बड़े चेहरे हैं, जिन्हें बचाने का प्रयास हो रहा। विपक्षी नेताओं ने एक जनप्रतिनिधि की भूमिका पर भी सवाल उठाया था, जिनकी कोठी के इर्द गिर्द मतदाता सूची से जुड़ी गतिविधियां हुईं थीं। विपक्षियों के सवाल पर भी जनप्रतिनिधि का जवाब नहीं आया है।
शहर सीट के अमरिया व ललौरीखेड़ा ब्लाक क्षेत्र में रहने वाले 10,470 मतदाताओं या उनके पिता के नामों में परिवर्तन कर दिया गया था। कई मतदाताओं ने एपिक आईडी (वोटर पहचान संख्या) से अपने वोट चेक किए तब सच सामने आया।
यदि वे लोग समय रहते फर्जीवाड़ा नहीं पकड़ते तो मतदान से वंचित रह सकते थे। इस मामले को सपा व कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने उठाया। सपा के प्रदेश नेतृत्व ने लखनऊ में भी प्रकरण को उठाया, तब निर्वाचन आयोग ने संज्ञान लिया था।
23 अक्टूबर को निर्वाचन आयोग के निर्देश पर डीएम आलोक कुमार ने अमरिया के वर्तमान एवं पूर्व निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (एसडीएम) मयंक गोस्वामी, हेमंत चौधरी एवं मतदाता पंजीकरण केंद्र के कंप्यूटर आपरेटर आलोक कुमार को पद से हटाकर मुख्यालय संबद्ध कर दिया था।
इन तीनों पर प्रशासन की ओर से प्राथमिकी भी दर्ज कराई। रिपोर्ट में उल्लेख था कि लोक सेवक ने जानबूझकर नुकसान पहुंचाया। इस फर्जीवाड़ा में दो अफसरों को भूमिका होने पर प्राथमिकी हो गई, मगर उन्होंने ऐसा क्यों किया, इसकी जड़ नहीं तलाशी जा सकी।
दूसरे जिलों से स्थानान्तरित होकर आए एसडीएम को मतदाता सूची में फर्जीवाड़ा करने की दिलचस्पी क्यों थी, इसकी वजह नहीं बताई गई। उन्होंने किसके कहने पर इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम गलत किए, या किसकी साठगांठ पर ऐसा किया।
इस सवाल का जवाब षड्यंत्र की तह तक ले जा सकता है। प्रशासन ने इसकी जानकारी भी नहीं जुटाई। कंप्यूटर आपरेटर के बयान जांच में सबसे अहम हैं, क्योंकि उसी के हाथ से सभी नाम बदले गए।
उससे पूछताछ नहीं की गई, उसके बयान भी अब तक दर्ज नहीं हो सके हैं। आरंभिक जांच के तौर पर प्रशासन ने स्वीकारा था कि 10,470 वोटरों के नाम फार्म आठ (नाम परिवर्तन आवेदन) के माध्यम से बदले गए थे।
इस माध्यम से फर्जीवाड़ा तो हुआ, मगर मतदाता पंजीकरण केंद्र में एक भी फार्म बरामद नहीं हुआ। प्रशासन का कहना है कि अभी तक उनके पास किसी की नामजद शिकायत नहीं है। वहीं, पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है।
सपा व कांग्रेस के आरोपों पर जवाब नहीं
सपा और कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने आरोप लगाया था कि एक जनप्रतिनिधि की शह पर फर्जीवाड़ा हुआ है। मतदाता सूची में वोटरों के नाम बिगाड़ दिए गए, उसी स्थिति में वे मतदान से वंचित रह जाते।
उनका आरोप था कि जनप्रतिनिधि की कोठी के पास ही मतदाताओं के नामों में परिवर्तन किया गया, वहां सिर्फ दो लोगों के आने-जाने की अनुमति थी।
पुलिस ने उसी रात प्राथमिकी दर्ज कर ली थी, मगर जांच एक कदम आगे नहीं बढ़ सकी। कंप्यूटर आपरेटर के बयान इसमें सबसे प्रमुख थे, लेकिन अब तक पूछताछ नहीं हुई।
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