पीलीभीत टाइगर रिजर्व के 3 गेट और उनकी अनोखी कहानी: जानिए किस रास्ते से दिखेगा बाघ और कौन सा गेट आपके लिए है बेस्ट
पीलीभीत टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी के लिए तीन प्रमुख गेट - मुस्तफाबाद, महोफ और बाराही - हैं, जिनमें से ...और पढ़ें

पीलीभीत टाइगर रिजर्व
HighLights
पीटीआर के जंगल में जाने के लिए पर्यटकों को महोफ, मुस्तफाबाद और बाराही गेट से मिलते सफारी वाहन
पीयूष दुबे, पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व ( पीटीआर) में जंगल सफारी करने के लिए बनाए दो रूट से गुजरकर आप वन्यजीवों व खूबसूरत प्राकृतिक नजारे देखते हैं, लेकिन जंगल जाने के लिए जिस गेट से आप प्रवेश करते हैं, उनकी अपनी अलग-अलग कहानी हैं। हर गेट अपने अंदाज को बयां करता है।
हर गेट से जंगल सफारी करने का अलग लुत्फ है। अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले लोगों के लिए गेट स्थापित किए गए, जिससे पर्यटकों को अधिक सुविधा मिल सके। इन तीनों ही गेटों से जंगल सफारी संचालित की जा रही हैं।
730 वर्ग किलोमीटर में फैला पीटीआर का जंगल बाघ, तेंदुआ, हिरण की पांच प्रजातियों, भालू, हाथी, सर्प और पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों के अलावा एक से बढ़कर एक पौधों को समाहित किए है। वहां, प्रकृति की छांव में पर्यटक आनंदित हो जाते हैं।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व की 2014 में स्थापना के बाद सबसे पहला गेट मुस्तफाबाद में वर्ष 2019 में खोला गया था। पीलीभीत मुख्यालय से यह जंगल 55 किलोमीटर दूर है।
उत्तराखंड की ओर से आने वाले पर्यटकों के लिए सबसे मुफीद है। उत्तराखंड के खटीमा से निकलते ही जंगल के क्षेत्र में आ जाते हैं, जिससे पर्यटकों को जंगल घूमने का मौका अतिरिक्त मिल जाता है।

मुस्तफाबाद गेट से आपको दोनों रूटों के लिए जंगल सफारी मिलेगी। गेट पर पार्किंग की बेहतर सुविधा होने के साथ ही सर्वाधिक 30 जंगल सफारी वाहनों को खड़ा किया जाता है।
जबकि सबसे अधिक पर्यटक भी यहां से ही जंगल में प्रवेश करते हैं। सेल्फी प्वाइंट, बुकिंग काउंटर, कैंटीन की सुविधा है। गेट के पास गेस्ट हाउस से सटे पीटीआर के जंगल में वहां मृग अक्सर नजर आ जाते हैं।
दूसरा महोफ गेट है, जिसको वर्ष 2024 में शुरू किया गया। शहर से महज 14 किलोमीटर दूर स्थित इस गेट से में पहुंचना सबसे आसान है। दिल्ली, बरेली समेत पश्चिम यूपी से आने वाले पर्यटकों के लिए यह गेट सबसे बेहतर है।

इसमें शहर के होटलों में रुकने के साथ भी सफारी कर सकते हैं। महोफ गेट से सफारी करने पर दोनों 28 किलोमीटर जंगल अतिरिक्त घूमने को मिलता है, जो पर्यटकों के लिए फायदे का सौदा है।
इस गेट पर 10 सफारी वाहनों को खड़ा किया जाता है। महोफ गेट पर स्थित ब्रिटिशकालीन स्कूल में कैंटीन का संचालन किया जाने लगा है। इस गेट से पर्यटक अधिक जंगल भ्रमण करते हैं।
तीसरा बाराही गेट है, जो वर्ष 2025 में खोला गया। यह गेट लखीमपुर, सीतापुर, लखनऊ समेत पूर्व की ओर आने वाले पर्यटकों के लिए मुफीद है।

इस रूट से सफारी करने पर 12 किलोमीटर अतिरिक्त जंगल घूमने को मिलता है, क्योंकि बाराही गेट से हल्दी डेंगा पुल तक आने और जाने का रूट अधिक हो जाता है। इसमें भी पर्यटकों के अधिक जंगल भ्रमण करने का मौका मिलता है।
विशेष पर्यटन स्थल
चूका बीच, भेल्हा के ग्रास लैंड, सप्त सरोवर, साइफन, बाइफरकेशन, भीमताल, आनंद ताल, मृगनयनी के घास के मैदान, लिड्सिया ताल, मगरमच्छ प्वाइंट, माला नदी, कच्ची पटरी, पक्की पटरी, सेमल ता, चौगेबी का कुआं आदि विशेष पर्यटन स्थल हैं।
रूट जोन-1 : पहला रूट करीब 65 किलोमीटर का है, जो महोफ, चौगेबी कुआं, लिटसिया ताल, आनंद ताल, माला नदी, मुस्तफाबाद, चूका बीच, बड़ी कच्ची पटरी होते हुए उत्तराखंड रोड से वापस भीमताल होते हुए महोफ सफारी पूरी होती है।
रूट जोन-2 : दूसरा रूट करीब 45 किलोमीटर का है, जो मुस्तफाबाद होते हुए सांभर ताल, बाइफरकेशन, साइफन, एसएसबी कैंप, सप्त सरोवर, हल्दीडेंगा पुल, कच्ची पटरी होते हुए चूका बीच पहुंचेंगे। वहां से लौटते हुए पक्की पटरी के रास्ते मुस्तफाबाद में समापन होगा।
बाराही, महोफ और मुस्तफाबाद गेट से सफारी करने पर तीनों का अलग-अलग आनंद है। पहली नवंबर को पर्यटन सत्र शुरू हो रहा है, जिससे पर्यटकों के लिए जंगल के दरवाजे खोल दिए जाएंगे।
- मनीष सिंह, डीएफओ
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