पीलीभीत टाइगर रिजर्व: तेज रोशनी और हॉर्न का शोर कर रहा वन्यजीवों को बीमार, बहरेपन की चपेट में बाघ
पीलीभीत टाइगर रिजर्व में वाहनों के शोर और तेज रोशनी से वन्यजीवों का तनाव बढ़ रहा है। दो साल पहले ...और पढ़ें

माधोटांडा खटीमा मार्ग पर विचरण करते बाघों के चेहरे पर पड़ रही गाड़ियों की हेडलाइट। स्रोत: इंटरनेट मीडिया
HighLights
पीलीभीत टाइगर रिजर्व की सड़कों पर गुजरने वाले वाहनों से खतरा
पटाखों की आवाज व शोर के कारण दो वर्ष पहले बहरा हो चुका बाघ
सृजित अवस्थी, पीलीभीत। शांति ऐसी कि सूखे पत्ते गिरने की आवाज भी सुनाई दे। प्राकृतिक आवरण इतना घना की सूर्य की किरणें भी ठिठक जाएं...। जंगल में वन्यजीव इसी वातावरण में रहने के आदी होते हैं, मगर मानवीय हस्तक्षेप ने उन्हें परेशान कर दिया। टाइगर रिजर्व की सड़कों से गुजरने वाले वाहनों के तेज हार्न व रात्रि में तीव्र लाइटें उन्हें तनाव की ओर धकेल रही।
दो वर्ष पहले केसरी बाघ के बहरे होने का कारण भी इसी प्रकार का था। वह गांवों में विचरण करने लगा तो ग्रामीणों ने भगाने के लिए पटाखों की आवाज व बर्तन पीटकर शोर किया था।
इससे उसके सुनने की क्षमता नष्ट हो गई, शिकार भी नहीं कर पा रहा था। इस उदाहरण के सहारे वन्यजीव विशेषज्ञ चिंता जताते हैं कि गाड़ियों के हार्न भी पटाखों की आवाज से कम नुकसानदेय नहीं हैं।

मानव की जिम्मेदारी है कि वह पर्यावरण के स्वास्थ्य और प्रकृति चक्र की चिंता करे। इसी उद्देश्य से प्रत्येक 26 सितंबर को विश्व पर्यावरण स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व के पशु चिकित्साधिकारी दक्ष गंगवार बताते हैं कि मानव वन व वन्यजीवों के प्रति अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा रहे। जंगल से गुजरने वाले माधोटांडा, पूरनपुर, खटीमा मार्ग पर दिनभर वाहनों का शोर होता है।
यह जंगल के संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र के लिए खतरनाक है, इसे समझने की जरूरत है। मानव शोरगुल का आदी हो चुका, मगर वन्यजीव जंगल के शांत वातावरण में रहते हैं।
हार्न की ध्वनि से वन्यजीव का तनाव (कार्टीसोल लेवल) तेजी से बढ़ता है। उनका संचार माध्यम भी बाधित होता है। दरअसल, वन्यजीव आपात स्थिति होने या साथी को बुलाने के लिए विशेष ध्वनियां निकालते हैं।
यदि वाहनों का शोर होता रहेगा तो उनकी विशेष ध्वनियां साथियों तक नहीं पहुंच सकेंगी। रात्रि में वाहनों की तेज रोशनी से वन्यजीवों के सोने-जागने, शिकार करने एवं प्रजनन का चक्र बिगड़ता है।
दो वर्ष पहले केसरी बाघ का रेस्क्यू कर स्वास्थ्य परीक्षण कराने पर बहरा पाया गया। पटाखों के शोर के कारण उसके सुनने की क्षमता खत्म हो गई थी, इस कारण वह जंगल में शिकार के बजाय गांव में लोगों पर हमला करने लगा था।
रात्रि में वाहनों के आवागमन पर पाबंदी
टाइगर रिजर्व के प्रभागीय वनाधिकारी मनीष सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट आदेशित कर चुका कि जंगल में रात्रि में वाहनों की आवाजाही न हो। इसके अनुपालन में बेहद जरूरी वाहनों को ही समूहों में गुजारा जाता है।
उनके आगे वन विभाग का वाहन चलता है, ताकि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास में बाधा न उत्पन्न हो। इसके बावजूद यदि रात्रि में वाहन तेज रोशनी में चलाए जा रहे, दिन में हार्न का उपयोग किया जा रहा तो इस पर सख्ती से रोक लगाएंगे।
