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पीलीभीत टाइगर रिजर्व में नहर किनारे बिछा 'लोहे का जाल', बाघों की जान पर मंडराया बड़ा खतरा

Published: Fri, 25 Sep 2026 12:00 AM (IST)

पीलीभीत टाइगर रिजर्व में नहरों की पटरियों पर बिछाए गए लोहे के जाल बाघों के लिए खतरा बन गए हैं, ...और पढ़ें

पीलीभीत टाइगर रिजर्व में नहर की पटरी पर बिछाए गए पत्थरों पर पड़े लोहे के जाल के ऊपर से गुजरता बाघ। वीडियो ग्रैब

पीलीभीत टाइगर रिजर्व में नहर की पटरी पर बिछाए गए पत्थरों पर पड़े लोहे के जाल के ऊपर से गुजरता बाघ। वीडियो ग्रैब

HighLights

  1. वन विभाग की ओर से उच्च स्तर पर भेजी जा चुकी रिपोर्ट, सिंचाई विभाग को भी दी जानकारी

  2. जंगल और वन्यजीवों के लिए जीवनदायिनी नहरें, तलाशने होंगे नहर कटान की सुरक्षा के अन्य विकल्प

बहजत खान, कलीनगर (पीलीभीत)। पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) की सुंदरता में यहां से गुजरने वाली नहरों की अहम भूमिका है। बहता पानी जंगल की हरियाली को बनाए रखने के साथ ही वन्यजीवों की प्यास भी बुझाता है। गर्मी और बारिश के मौसम में बाघ समेत तमाम वन्यजीव अक्सर नहरों के किनारे पानी पीते और विचरण करते दिखाई देते हैं।

नहरें जंगल और वन्यजीवों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही हैं। लेकिन, इनकी पटरियों पर बिछाए गए लोहे के जाल बाघों के लिए खतरे का कारण बन सकता है। पीटीआर क्षेत्र से शारदा मुख्य नहर के अलावा कई अन्य नहरें होकर गुजरती हैं।

इन नहरों की पटरियों की समय-समय पर सिंचाई विभाग की ओर से मरम्मत कराई जाती है, जिन स्थानों पर नहर की पटरी कमजोर हो जाती है। वहां मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए पत्थरों की पिचिंग की जाती है।

इन पत्थरों को व्यवस्थित रखने और पिचिंग को रोकने के लिए मोटे लोहे के तारों से बने जाल का इस्तेमाल किया जाता है। शारदा मुख्य नहर की कच्ची और पक्की पटरी बाघों की साइटिंग के लिए प्रमुख स्थानों में शामिल है।

नहर में पानी होने के कारण बाघ और अन्य वन्यजीव अक्सर यहां पहुंचते हैं। बाघ नहर के किनारे पानी पीने के साथ ही कई बार पानी में उतरते भी हैं। ऐसे में नहर की पटरियों पर पत्थरों के ऊपर बिछे लोहे के तारों से बने जाल वन्यजीवों के लिए परेशानी का कारण बन सकते हैं।

बाघ जब नहर के किनारे इन पत्थरों पर चलते हैं तो बाघ के पैर इन जालों में फंसने और उसके घायल होने की आशंका बनी रहती है। पूर्व में वन विभाग की ओर से भी बाघों और अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा को देखते हुए इन लोहे के जालों को लेकर आपत्ति जताई गई थी।

वन विभाग ने सिंचाई विभाग और उच्चाधिकारियों को इसकी जानकारी भी दी और रिपोर्ट भी भेजी थी। इसके बावजूद बाघों की आवाजाही वाले स्थानों पर पड़े इन जालों से वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।

पीलीभीत टाइगर रिजर्व में नहरों का नेटवर्क वन्यजीवों के लिए पानी का महत्वपूर्ण स्रोत है। ऐसे में इनकी पटरियों की मरम्मत जरूरी है, लेकिन मरम्मत के दौरान वन्यजीवों की सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाना आवश्यक है।

बाघों की नियमित साइटिंग वाले क्षेत्रों में लोहे के जालों का इस्तेमाल वन्यजीवों के लिए कितना सुरक्षित है, इस पर विशेषज्ञों और वन विभाग के अधिकारियों को गंभीरता से विचार करना होगा।

नहरें जंगल की हरियाली और वन्यजीवों की प्यास बुझाने का माध्यम बनी रहें, लेकिन यही नहरें किसी बाघ के घायल होने का कारण न बनें, इसके लिए समय रहते उचित व्यवस्था किए जाने की जरूरत है।

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