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19 करोड़ की फेंसिंग बेकार! पीलीभीत टाइगर रिजर्व से बाहर आ रहे बाघ और तेंदुए, वन्यजीव-मानव संघर्ष का खतरा बढ़ा

Published: Tue, 22 Sep 2026 06:00 AM (IST)

पीलीभीत टाइगर रिजर्व में 19 करोड़ रुपये की लागत से बनी 67 किमी लंबी फेंसिंग 20 से अधिक स्थानों पर ...और पढ़ें

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HighLights

  1. पीटीआर में 67 किमी क्षेत्र में कराई थी तार लिंक फेंसिंग, टाइगर रिजर्व में करीब 20 से ज्यादा स्थानों पर फेंसिंग गलकर टूटने लगी

जागरण संवाददाता, पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व में चार वर्ष पहले 19 करोड़ रुपये से 67 किमी क्षेत्र में तार लिंक फेंसिंग लगाई थी। नौ फीट ऊंची फेंसिंग लगाकर वन्यजीवों को जंगल से बाहर आने से रोकने का प्रयास किया गया था। अब 20 से ज्यादा स्थानों पर फेंसिंग गलकर टूटने लगी। इससे वन्यजीव आसानी से जंगल से निकलकर आसपास के गांवों में पहुंच जाते हैं।

धीरे-धीरे अन्य स्थानों पर भी फेंसिंग टूटने का अंदेशा है। वन अधिकारियों के सामने समस्या है कि दोबारा फेंसिंग नहीं लगाई जा सकती, क्योंकि पिछले वर्ष सुप्रीम कोर्ट रोक लगा चुका।

इसके पीछे तर्क दिया गया था कि वन्यजीवों को स्वतंत्र विचरण से रोक नहीं सकते। फेंसिंग टूटने व नई न लग पाने से जंगल के आसपास के गांवों में वन्यजीवों की गतिविधियां बढ़ने का डर है।

पीटीआर के वनक्षेत्र में क्षतिग्रस्त हुई फेंसिंग। जागरण

इसके चलते बाघ और तेंदुए जैसे वन्यजीवों के जंगल से निकलकर सीधे रिहायशी इलाकों और किसानों के खेतों तक पहुंचने का खतरा एक बार फिर गहरा गया है।

वन विभाग के अनुसार, पीटीआर के अंतर्गत आने वाली विभिन्न रेंजों में अलग-अलग चरणों में कुल 67 किलोमीटर लंबी चेनलिंक फेंसिंग कराई गई थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य वन्यजीवों और इंसानों के बीच होने वाले संघर्ष को टालना था।

परियोजना के तहत सर्वाधिक फेंसिंग माला रेंज में 32 किलोमीटर तक कराई गई। इसके अलावा महोफ रेंज में 24.5 किलोमीटर और बाराही रेंज में 10.5 किलोमीटर क्षेत्र को सुरक्षित किया गया था।

पीटीआर के वनक्षेत्र में क्षतिग्रस्त फेंसिंग। जागरण

निर्माण के समय यह उम्मीद जताई गई थी कि इससे वन्यजीवों का आबादी की तरफ आना बंद हो जाएगा। शुरुआत में इस फेंसिंग का लाभ भी दिखा, लेकिन समय बीतने के साथ ही इसके उचित रखरखाव में ढिलाई बरती गई।

इसके अलावा, जंगली जानवरों के मूवमेंट के कारण फेंसिंग कई जगह से टूट गई है। तार और पोल उखड़ चुके हैं, जिससे जंगल और आबादी के बीच बनी यह अहम दीवार अब हट गई है।

फेंसिंग टूटने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। हालांकि, वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और मरम्मत का कार्य चल रहा है।

बढ़ जाता है संघर्ष का खतरा

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, जंगल के बाहरी इलाके को वन्यजीव गलियारे के रूप में इस्तेमाल करते हैं। क्षतिग्रस्त फेंसिंग से उनका बाहर आना तो आसान है, लेकिन वे आसानी से अंदर प्रवेश नहीं कर पाते। नतीजतन कई बार संघर्ष की परिस्थितियां बन जाती हैं।

बीते वर्ष शहर से सटे बनकटी क्षेत्र में भी एक बाघिन ऐसी ही क्षतिग्रस्त फेंसिंग के सहारे बाहर आई थी। बाघिन एक माह से अधिक समय तक आबादी के बीच बनी रही। इस दौरान उसने दो लोगों को निवाला बनाने के साथ दो अन्य लोगों को गंभीर रूप से घायल भी किया था।

 

जिले में लगातार प्रवासी हाथियों की आमद बनी हुई है। हाथियों की चहलकदमी के कारण काफी फेंसिंग क्षतिग्रस्त होती रही है। सभी का रखरखाव कराया जा रहा है। शेष बची फेंसिंग को लेकर भी जल्द ही दुरुस्त कराने के निर्देश दिए गए हैं।

- मनीष सिंह, डीएफओ, पीटीआर


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