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पीलीभीत: चलती ट्रेन से जंगल में खाना फेंकना पड़ा भारी, बंदरों का झुंड ट्रेन के पीछे भागा; DFO ने दी कार्रवाई की चेतावनी

Published: Mon, 21 Sep 2026 06:05 PM (IST)

पीलीभीत टाइगर रिजर्व में चलती ट्रेन से वन्यजीवों को खाना फेंकने का एक वीडियो वायरल हुआ है। वन्यजीव विशेषज्ञ ने ...और पढ़ें

पीटीआर स्थित माला रेलवे स्टेशन पर वन्यजीवों को खाना फेंकता युवक। स्रोत: वीडियो ग्रैब

पीटीआर स्थित माला रेलवे स्टेशन पर वन्यजीवों को खाना फेंकता युवक। स्रोत: वीडियो ग्रैब

HighLights

  1. माला रेलखंड का मामला, खाना देख ट्रेन की ओर भागे वन्यजीव

  2. वन्यजीव की सुरक्षा को खतरा, प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका

सृजित अवस्थी, पीलीभीत। आमतौर पर पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) से वन्यजीवों के आकर्षक वीडियो ही सामने आते हैं। कई बार आबादी में आए वन्यजीवों से जुड़े वीडियो भी इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित होते हैं, लेकिन बीते कुछ दिनों से ऐसे मामले देखे जा रहे हैं, जो जिम्मेदारों के साथ आम लोगों की जिम्मेदारी पर भी सवालिया निशान लगा रहे हैं।

हाल ही में एक ऐसा वीडियो प्रसारित हुआ है, जिसमें एक युवक वन्यजीवों को देखकर चलती ट्रेन से जंगल में खाना फेंक रहा है। हालांकि, ऐसा करना कानूनन अपराध के साथ मानवीय तौर भी वन्यजीवों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

भारतीय संस्कृति में बेजुबानों को भोजन देने को पुण्यकर्म से जोड़कर देखा जाता है। सनातन धर्म में अधिकतर पशु-पक्षियों को भगवान का स्वरूप या फिर उनका वाहन माना जाता है।

संरक्षण के लिहाज से तो ये मान्यताएं लाभकारी हैं, लेकिन इंटरनेट मीडिया पर लाइक व शेयर पाने की चाह अब पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव डालने लगी है। हाल ही में इसका जीता जागता उदाहरण देखने को मिला।

हाल ही में इंटरनेट मीडिया पर एक वीडियो प्रसारित हो रहा है, जिसमें एक युवक चलती ट्रेन से वन्यजीवों को खाना फेंकता नजर आ रहा है। वीडियो पीलीभीत-मैलानी रेलखंड का बताया जा रहा है।

वीडियो में देखा जा सकता है कि युवक को माला रेलवे स्टेशन के समीप पहुंचते ही हाथियों का झुंड नजर आता है। यह देखकर युवक अपने हाथ में मौजूद डिब्बे से खाना फेंकना शुरु कर देता है। हालांकि, ट्रेन की गति के कारण वह खाना हाथी के बजाए बंदरों को मिलता है।

खाने के लालच में बंदरों का झुंड ट्रेन के साथ दौड़ना शुरू कर देते हैं। यह प्रत्यक्ष रूप से तो वन्यजीवों के लिए खतरनाक था ही, बल्कि यह वनक्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है।

वाइल्डलाइफ फिल्म निर्माता व वन्यजीव विशेषज्ञ विवेक अवस्थी बताते हैं कि वन्यजीवों को जंगल में खाना डालना लोगों को पुण्यकर्म लग सकता है, लेकिन ऐसा करना उन्हीं वन्यजीवों के लिए खतरनाक है।

ऐसा करने से वन्यजीव आसान भोजन के आदी हो जाते हैं। वे सड़क या फिर बस्ती के किनारे अपना डेरा जमा लेते है। कई बार छोटे वन्यजीवों के शिकार के कारण तेंदुए भी घात लगा लेते हैं।

ऐसा करना पारिस्थितिकी तंत्र को कमजोर करता है। साथ ही मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावना भी बढ़ जाती है। वीडियो प्रसारित होने के बाद वन विभाग मामले की जांच में जुटा है। (जागरण प्रसारित वीडियो की पुष्टि नहीं करता है।)

 

रेलमार्ग के माध्यम से हजारों यात्री सफर करते हैं। जिसकी निगरानी विभाग के लिए व्यवहारिक रूप से संभव नहीं है। लोगों से अपील है कि वनक्षेत्रों से यात्रा के दौरान विशेष निगरानी बरतें। इस दौरान कोई भी खाने का सामान या कचरा वन में न फेंके। ऐसा करते पाए जाने पर जुर्माने समेत विधिक कार्रवाई का प्रावधान है।

- मनीष सिंह, डीएफओ, पीटीआर


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