पीलीभीत में आपदा के नाम पर खेल: वन विभाग ने बिना अनुमति कटवा दिए दर्जनों पेड़, DFO ने कटान पर लगाई रोक
पीलीभीत में वन विभाग ने दैवीय आपदा के नाम पर बिना अनुमति दर्जनों पेड़ काट दिए और लकड़ी ठिकाने लगाई। ...और पढ़ें

पूरनपुर में काटे गए आंधी में गिरे पेड़ की जड़। जागरण
HighLights
मामला उजागर होने पर डीएफओ ने कटान और ढुलान पर लगाई रोक
चार दिन पहले दैवीय आपदा में गिरे थे सड़कों के किनारे खड़े 77 पेड़
संवाद सहयोगी, पूरनपुर (पीलीभीत)। बारिश और तेज हवा चलने से सड़कों के किनारे फारेस्ट लाइन में खड़े करीब 77 पेड़ गिर गए। वन विभाग की ओर से पेड़ों को काटकर आवागमन सुचारु कराया गया। इसके बाद अगले दिन वन विभाग ने मनमाने तरीके से गिरे हुए पेड़ों का कटान शुरु करा दिया। इसके लिए उच्चाधिकारियों से अनुमति लेना मुनासिब नहीं समझा।
तीन दिन से पेड़ों का कटान कर लकड़ी को भी ठिकाने लगाया जा रहा है। कार्रवाई से बचाव को कुछ लकड़ी रेंज कार्यालय लाई गई। मामला उजागर होने के बाद डीएफओ ने पेड़ों के कटान और ढुलान पर रोक लगा दी है।
पूरनपुर सामाजिक वानिकी क्षेत्र के पीलीभीत बस्ती हाईवे, पूरनपुर बायां मैगलगंज, कलीनगर रोड, माधोटांडा रोड, शाहगढ रोड के किनारे फारेस्ट लाइन में विभिन्न प्रजातियों के दशकों पुराने पेड़ खड़े हुए हैं।

सात अक्टूबर की शाम अचानक शुरू हुई बारिश और तेज हवा की चपेट में आकर करीब 77 पेड़ धराशायी हो गए। सड़कों पर पेड़ गिरने से आवागमन बाधित हो गया। वन विभाग की टीमों ने अलग अलग क्षेत्रों में पहुंचकर गिरे पेड़ों को काटकर आवागमन सुचारू कराया।
गुरुवार को वन विभाग की टीम ने शाहगढ़ रोड पर गिरे पे़डों का जड़ से कटान शुरु करा दिया। दिन उजाले के अलावा मनमाने तरह से रात में भी पेड़ों का कटान कर लकड़ी ठिकाने लगाई जाती रही।
बीते तीन दिनों से सकरिया सेक्सन के शाहगढ रोड पर अर्जुन, शीशम सहित विभिन्न प्रजातियों के पेड़ों का सफाया किया जा रहा है। पेड़ों का कटान और ढुलान के लिए उच्चाधिकारियों से अनुमति भी नहीं ली गई।
वन विभाग की ओर से करीब 40 पेड काटे जा चुके हैं। शनिवार मामला मुख्य वन संरक्षक पीपी सिंह के संज्ञान में पहुंचने पर खलबली मच गई। सामाजिक वानिकी डीएफओ भरत कुमार डीके ने बगैर अनुमति के चल रहे पेड़ों के कटान और लकड़ी के ढुलान को रुकवा दिया।
पेड़ों के गिरने के बाद उन्हें उठाने के लिए यह है सही प्रक्रिया
दैवीय आपदा में पेड़ गिरने के बाद सेक्शन प्रभारी की तरफ से उसकी लकड़ी की चोरी, नुकसान आदि की संभावना जताकर डीएफओ से छपान की अनुमति ली जाती है।
दो तीन पेड़ होने पर डीएफओ, इससे अधिक होने पर मुख्य वन संरक्षक की अनुमति के लिए फाइल भेजी जाती है। अनुमति मिलने के बाद वन विभाग की टीम गिरे हुए पेड़ों की प्रजाति, आयतन, संख्या की रिपोर्ट तैयार करती है।
इसके बाद वन निगम की तरफ से मूल्यांकन की रकम जमा कर पेड़ों को तय शर्तों के साथ काटा जाता है। हालांकि शाहगढ़ रोड पर वन विभाग की टीम ने किसी भी प्रक्रिया का पालन नहीं किया।
दैवीय आपदा में गिरे पेड़ों की चोरी होने की आशंका पर कटवाकर उसकी लकड़ी रेंज कार्यालय रखवा दी गई है। 29 पेड़ काटे गए है। उनका छपान कराकर वन निगम को नीलामी के लिए सुपुर्द कर दिया जाएगा। हालांकि कटान और ढुलान की कोई लिखित अनुमति नहीं दी गई है।
- भरत कुमार डीके डीएफओ, पीलीभीत
बारिश और तेज हवा से गिरे पेड़ों के लिए सेक्शन प्रभारी के पत्राचार पर छपान की अनुमति दी जाती है। इसके बाद वन निगम पेड़ों को काटता है। डीएफओ से मामले की जानकारी की जाएगी। बगैर छपान के पेड़ों का कटान कराए जाने की जांच कराई जाएगी।
पीपी सिंह, मुख्य वन संरक्षक, बरेली वृत्त।
