अयोध्या दीपोत्सव 2026: पीलीभीत की चंद्रकली के बनाए 5100 गोबर के दीयों से रोशन होगी रामनगरी
पीलीभीत की चंद्रकली ने अयोध्या दीपोत्सव के लिए गाय के गोबर से 5100 दीये तैयार किए हैं, जो रामनगरी को ...और पढ़ें

गाय के गोबर से दीपक बनातीं चंद्रकली व अन्य महिलाएं। स्रोत स्वयं
HighLights
डीएम के निर्देश पर पूरा किया गया काम, बिलसंडा की रानी सात डिजाइन की मोमबत्तियां बनाकर पांच महिलाओं को दे रहीं रोजगार
वैभव मिश्रा, पीलीभीत। चाइनीज झालरों की चमक के बीच इस बार रामनगरी अयोध्या के दीपोत्सव में पीलीभीत की मेहनत और हुनर का प्रकाश भी नजर आएगा। जिले की महिला के हाथों से तैयार 5100 गोबर के दीये अयोध्या के दीपोत्सव की शोभा बढ़ाएंगे। तैयार किए गए सभी दीये गुरुवार शाम को अयोध्या भेज दिए गए।
देवीपुरा गांव की चंद्रकली ने गाय के गोबर से इन दीयों को तैयार किया है। खास बात यह है कि उनके हाथों से बने दीये रामनगरी को रोशन करने के साथ ही गांव की अन्य महिलाओं के लिए रोजगार का जरिया भी बन रहे हैं।
चंद्रकली ने अपने साथ आठ महिलाओं को इस काम से जोड़ा है। चंद्रकली ने बताया कि डीएम के निर्देश पर उन्होंने 5100 गोबर के दीये तैयार किए हैं। इन सभी दीयों को अयोध्या भेजा जाएगा, जहां दीपोत्सव में इनका उपयोग होगा।
इसके अलावा उन्होंने स्थानीय बाजार में बिक्री के लिए भी बड़ी संख्या में दीये तैयार किए हैं। त्योहार को देखते हुए उनके पास लगातार आर्डर पहुंच रहे हैं। उन्होंने बताया कि एक हजार दीये तैयार करने में करीब 20 किलो गाय का गोबर और 10 किलो गेरू की जरूरत पड़ती है।
यदि दीयों को अधिक रंगीन और आकर्षक बनाना होता है तो जरूरत के अनुसार अन्य सामग्री का इस्तेमाल भी किया जाता है। सामान्य दीयों की कीमत पांच रुपये से शुरू होती है, जबकि विशेष रंग और डिजाइन वाले दीयों की कीमत अलग होती है।
इस काम में गांव की कांति देवी और छाया देवी समेत अन्य महिलाएं सहयोग कर रही हैं। चंद्रकली के 5100 दीयों का अयोध्या पहुंचना जिले के स्थानीय हुनर के लिए खास उपलब्धि है।
एक ओर उनके बनाए दीये रामनगरी के दीपोत्सव में रोशनी बिखेरेंगे तो दूसरी ओर रानी की रंग-बिरंगी मोमबत्तियां बाजार में लोगों को आकर्षित करेंगी।
विदेशी झालरों की चकाचौंध के बीच इन महिलाओं की मेहनत स्वदेशी उत्पादों को अपनाने का संदेश दे रही है। इनके लिए दीपावली सिर्फ रोशनी का त्योहार नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और रोजगार का अवसर भी बन गई है।
उधर, बिलसंडा क्षेत्र की रानी भी दीपावली पर स्वदेशी रोशनी का रंग बिखेरने में जुटी हैं। वह करीब सात अलग-अलग डिजाइन की मोमबत्तियां तैयार कर रही हैं।
रानी ने बताया कि उन्होंने करीब तीन महीने पहले यह काम शुरू किया था। धीरे-धीरे काम बढ़ा और अब उनके प्रयास से पांच महिलाओं को रोजगार मिल रहा है। इस समय रिया और देवकुमारी सहित अन्य महिलाएं मोमबत्तियां बनाने में जुटी हैं।
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